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ऽयुद्धोत्तर बिजली विकास
युद्ध स्थिति के उपरांत भारत में बिजली के बड़े संयंत्रों की आवश्यकता को देखते हुए एक कार्यक्रम तैयार किया गया है और देश के लिए आवश्यक बिजली उत्पादन की दिशा में कदम उठाए गए हैं। माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर, श्रम सदस्य, ने लोक निर्माण और विद्युत विषय पर नीति समिति की दूसरी बैठक में अपने संबोधन में यह सूचना दी। बैठक 2 फरवरी को नई दिल्ली में हुई।
डॉ. अम्बेडकर के भाषण का पूरा पाठ इस प्रकार हैः
मैं सर्वप्रथम सभी नए और पुराने सदस्यों का इस बैठक में हार्दिक स्वागत करता हूं। नए और पुराने का जिक्र इसलिए करना पड़ रहा है कि इस बार कुछ नए सदस्य बैठक में सम्मिलित हुए हैं जो पिछली बैठक में नहीं थे। ये भारत के विद्युत उपक्रमों और संगठित श्रमिकों का भारत के भावी विद्युतीय विकास से महत्वपूर्ण संबंध है। कोई भी फैसला लेने से पूर्व विचार-विमर्श के दौरान वे जो कहते हैं उस पर गौर किया जाना चाहिए। मुझे खेद के साथ कहना है कि पिछली बार उनको सम्मिलित न करना एक भूल थी। मैं इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूं क्योंकि वास्तव में यह एक बड़ी कमी थी। मैं समझता हूंं कि आज उन्हें अपने बीच देखकर हम बहुत खुश हैं और हमें अपने विचारणीय विषय पर उनके योगदान की आशा है।
बिजली इंजीनियरों का सम्मेलन
मेरे विचार से अध्यक्ष होने के नाते मुझे पहले यह बताना चाहिए कि भारत सरकार ने बिजली विकास के बारे में युद्धोपरांत क्या कदम उठाए हैं क्योंकि पिछली बैठक 25 अक्तूबर, 1943 को हुई थी, इसलिए हो सकता है कि इस कारण आपको यह जानकारी न हो।
इस समिति की पिछली बैठक के तुरंत बाद युद्धोपरांत बिजली विकास के लिए भारत के विद्युत आयुक्त श्री मैथ्यू ने सरकार की अनुमति से देश के प्रमुख सरकारी
ऽ इंडियन इनफार्मेशन, 15 फरवरी, 1945, पृष्ठ 235-41