210 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और गैर-सरकारी इंजीनियरों की बैठक बुलाई। सम्मेलन में सर्वप्रथम युद्ध के तुरंत बाद भारत में बिजली विकास के लिए भारी बिजली उपकरणों का कार्यक्रम तैयार किया गया। इसके साथ ही सम्मेलन में कुछ प्रस्ताव पारित किए गए जो, रिपोर्ट की भाषा में, उसके अध्ययनों, जांच और विचार-विमर्श के सर्वसम्मत निष्कर्ष थे। ये प्रस्ताव इस प्रकार हैंः-
- पहला, प्रांतों और रियासतों के अधिकार क्षेत्रों में पड़ने वाले इलाकों के बारे
में बिजली विकास संबंधी सिफारिशें की गईं और सुझाव पेश किए गए।
दूसरा, उनके तकनीकी बिजली बोर्ड बनाए जाएं।
तीसरा प्रस्ताव था कि सम्मेलन में विचारित भावी बिजली विकास के परिप्रेक्ष्य
की अविलंब जांच कराई जाए।
- चौथा प्रस्ताव रेलवे विद्युतीकरण, उर्वरक निर्माण और ग्रामीण विद्युतीकरण से
संबद्ध था।
सम्मेलन के सदस्यों ने अपनी सिफारिशों के साथ भेजे गए पत्र में कहा कि, ‘‘यह पहला अवसर है कि जब बिजली विकास कार्यक्रम के बारे में समन्वित रूप से विचार किया गया और सभी क्षेत्रों के अनुभवी इंजीनियरों की उपस्थिति से क्षेत्रीय आवश्यकताओं का मूल्यांकन बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ जिससे समस्त भारत की विविध दशाओं का समेकित अनुभव शामिल है।’’
भारी बिजली संयंत्र
मुझे विश्वास है कि आप सहमत होंगे कि हम सब सम्मेलन के अनुग्रहीत हैं कि इसने पूरे देश के बारे में युद्ध बंद होने के तुरंत बाद के समय के लिए आवश्यक बिजली उत्पादन की योजना प्रस्तुत की। सम्मेलन ने भारत सरकार से कहा है कि उसकी विभिन्न सिफारिशों के बारे में उपयुक्त कार्रवाई की जाए। सरकार का जिस कार्यवाही से संबंध है उस पर पहले ही काम शुरू हो चुका है। इसका संबंध उपकरण प्राप्त करने और तकनीकी बिजली बोर्ड बनाए जाने से है।
युद्ध समाप्ति के बाद के समय के लिए भारत की बिजली उपकरणों की आवश्यकता का कार्यक्रम तैयार कर लिया गया है और उपाय कर लिए गए हैं कि भारत के लिए आवश्यक उत्पादन क्षमता सुरक्षित कर ली जाए। कुल आरक्षित क्षमता 850 मेगावाट होगी और उस पर लगभग 50 करोड़ रुपए की लागत आएगी। भारत की नई अनुमानित बिजली क्षमता मौजूदा स्थापित क्षमता से 65 प्रतिशत अधिक होगी। हो सकता है कि अधिक विस्तृत जांच से पता चले कि हमारी उपकरणों की