38. युद्धोत्तर बिजली विकास - Page 236

युद्धोत्तर बिजली विकास

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आवश्यकता आरक्षित क्षमता से अधिक हो। परंतु भारत के हितों को हानि पहुंचाए बिना अभी इस विषय को और लटकाए रखना असंभव है। हम सीमित समय में जो आंकड़े तैयार कर सकें और उस पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

तकनीकी बिजली बोर्ड

आपको 8 नवम्बर, 1944 की प्रेस विज्ञप्ति से पता चला होगा कि भारत ने एक तकनीकी बिजली बोर्ड का गठन किया है। अध्यक्ष के अतिरिक्त इसमें दो पूर्णकालिक सदस्य होंगे। भारत सरकार ने श्री मैय्यू को इस विद्युत आयुक्त का अध्यक्ष नियुक्त किया है। एक सदस्य के रूप में अमरीका के श्री डब्ल्यू. एल. वूरदिन की सेवाएं ली गई हैं। भारत आने से पूर्व श्री वूरदिन टेनेसी घाटी प्राधिकरण के परियोजना अधिकारी थे। तीसरे सदस्य को उपयोगिता सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने का प्रस्ताव है। किसी योग्य इंजीनियर की भर्ती के प्रयत्न किए जा रहे हैं जिसे उपयोगिता का अनुभव हो। उच्च स्तरीय विशेषज्ञों की नियुक्ति से आप आश्वस्त होंगे कि भारत सरकार तकनीकी संगठन को सुदृढ़ बनाने के लिए कितनी उत्सुक हैं जो बिजली विभाग संबंधी विचारों को संकलित करेगा, कार्यक्रमों का सर्वेक्षण करेगा और योजनाएं बनाएगा। इसमें प्रांतीय और राज्य सरकारों से परामर्श लिया जाएगा। मैंने इसका जिक्र इसलिए किया है क्योंकि आपके लिए यह आवश्यक है कि आपको पता चले कि इस बीच क्या हुआ। हम यह भी दिखाना चाहते हैं कि भारत सरकार पूरी ईमानदारी और तत्परता से इस कार्यक्रम को आगे बढ़ा रही है।

तिहरा कार्यक्रम

बिजली नीति के विषय में एक और भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है जिसकी ओर मैं आप सबका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं। आपको याद होगा कि नीति समिति की पिछली बैठक में श्री कोलिंस ने बंबई सरकार की ओर से बंबई प्रेसीडेंसी में एक ग्रिड प्रणाली का विचार प्रस्तुत किया था। पिछले वर्ष के दौरान भारत सरकार ने इस बात पर गहराई से विचार किया कि देश के विभिन्न भागों में बिजली के स्थानीय विकास और क्षेत्रीय विकास को अलग-अलग रूप में देखा जाए। हम यह अनुभव करते हैं कि यदि बिजली सेवाएं उत्पादकों और उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जाएं तो इससे कार्य क्षमता बढ़गी। हमें इस कार्य को सावधानीपूर्वक और धैर्य से पूरा करना होगा जैसा कि शुरू से ही इंग्लैड में केंद्रीय बिजली बोर्ड ने किया है, अर्थात

(क) बड़े पैमाने के बिजली घरों की स्थापना जो प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित हों तथा सार्वजनिक उपक्रमों के नियंत्रण में हों।