38. युद्धोत्तर बिजली विकास - Page 237

212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(ख) मुख्य संप्रेषण प्रणाली का निर्माण (कृषि तथा अन्य क्षेत्रों के लिए छोटी वैकल्पिक लाइनें बिछाना) जिससे कि बड़े बिजली घरों की मुख्य प्रणाली से आसपास के पूरे क्षेत्रों का विकास हो सके।

(ग) बिजली प्रणाली के माध्यम से विकसित किए जाने वाले क्षेत्र में फ्रिक्वेंसी का यथासंभव मानक तैयार करना।

जैसाकि हम जानते हैं, इंग्लैंड में यह कार्यक्रम 1926 से चालू है। हमारे इस तिहरे कार्यक्रम की बुनियाद भी ग्रिड प्रणाली है और मुझे आशा है कि यदि हमारे देश में भी क्षेत्रीय विकास पर कार्यक्रम शुरू किया जाए तो हम जल्दी ही उपभोक्ता को चाहे वह बड़ा हो या छोटा बहुत वाजिब दरों पर बिजली उपलब्ध करा सकेंगे।

आपको यह जानने में दिलचस्पी हो सकती है कि जब इंग्लैंड में बड़े पैमान पर ग्रिड प्रणाली शुरू की गई थी तो यह अनुमान लगाया गया था कि 1940-41 तक बिजली का राष्ट्रीय उत्पादन 2 अरब 50 करोड़ यूनिट तक पहुंच जाएगा और बिजली पर कार्य लागत 1925-26 के 9.4डी से घटकर 4डी प्रति यूनिट रह जाएगी, जबकि बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को 1/2डी पर बिजली मिलेगी।

कार्यसूची की मदें

अब मैं आज की बैठक की कार्यसूची पर आता हूं। जैसाकि आप जानते हैं, आज की कार्यसूची में चार मदें हैं। मद में दो योजनाएं हैं। उनमें से एक हैं तकनीकी बिजली बोर्ड और दूसरी, बिजली में प्रशिक्षण के लिए भारतीयों को विदेश भेजना। इनमें कोई भी विवादास्पद मामला नहीं है। इसलिए इन पर मैं आपका अधिक समय नहीं लूंगा।

दूसरी मद दुर्भाग्य से उतनी विवादहीन नहीं है जितनी चौथी मद है। दूसरी मद बिजली उपक्रमों पर कुल लेखा सिद्धांत लागू करने संबंधी है ताकि उनकी आय,

खर्च और लाभ को निश्चित किया जा सके। परंतु यह मद उतनी विवादास्पद नहीं है जितनी दिखाई पड़ती है। इस मद पर दो प्रश्न उठते हैं। यदि उन पर अलग-अलग विचार किया जाए तो विवाद बहुत कम रह जाएगा।

पहला प्रश्न यह है कि बिजली आपूर्ति उपक्रम के डिवीडेंड का कोई संबंध बिजली के उपयोग की दरों के साथ होना चाहिए या नहीं। दूसरा प्रश्न है वाजिब डिवीडेंड कैसे निर्धारित किया जाए। पहले प्रश्न पर मेरा कहना है कि उस पर बहुत कम विवाद हो सकता है। बिजली, उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों की बुनियादी आवश्यकता है। इसलिए ऐसी बुनियादी सुविधा की दरें आपूर्तिकर्ताओं की इच्छा पर नहीं छोड़ी जा सकती। यदि देश में बिजली की सस्ती दरें और उसकी प्रचुरता