युद्धोत्तर बिजली विकास
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सुनिश्चित नहीं की गई तो भारत का औद्योगिक भविष्य संकट में पड़ जाएगा। इसलिए यह आवश्यक है कि डिवीडेंट सापेक्ष हो। यदि इसकी स्वीकृति नहीं दी गई तो यह निर्विवाद है कि उपक्रमों को लेखा रखने की विवशता होगी और वे कमियां दूर की जा सकेंगी जिनके कारण वे लाभ छिपा लें।
लेखा रखने का सिद्धांत
फिर यह विषय गौण हो जाता है। लेखा रखने के सिद्धांत पर जोर हम किसी क्रांतिकारी इरादे से नहीं दे रहे है। हम बिजली के संबंध में ब्रिटिश कानून का ही अनुसरण कर रह हैं जो लंदन बिजली अधिनियम, 1925 और बिजली सप्लाई अधिनियम, 1926 में उल्लिखित है। भारत के विद्युत आयुक्त ने एक ज्ञापन तैयार किया है जिसमें उन्होंने इस प्रकार के लेखाकरण सिद्धांत का एक सैट पेश किया है जो बिजली उपक्रमों पर लागू किया जाए। उनका ज्ञापन प्रांतीय सरकारों और बिजली उपक्रमों के पास भेज गया ताकि वे इस पर अपने विचार प्रकट करें। दुर्भाग्य से इस पर विरोधी विचार प्रकट किए गए हैं। इस खाई को पाटने के लिए भारत सरकार का इरादा एक सलाहकार बोर्ड बनाने का है जो उन सिद्धांतों पर परामर्श देगा जो न्यायसंगत और उचित हों। मुझे आशा है कि आपको इस समाधान से संतोष होगा।
अब कार्यसूची की मद संख्या 1 और 3 बची हैं। दरअसल यह हमारी कार्यसूची की महत्वपूर्ण मदें हैं और आप मुझे इस पर बोलने का कुछ समय देंगे।
मद संख्या एक पर मैं आपको याद दिला दूं कि नीति समिति की पिछली बैठक में क्या स्थिति थी। इस मद पर नीति समिति ने विचार-विमर्श की समाप्ति पर इच्छा प्रकट की थी कि सम्पन्न समझौते में निहित उपायों पर श्रम विभाग एक प्रस्ताव तैयार करे और इस पर नीति समिति की अगली बैठक में समुचित विचार-विमर्श हो। तदनुसार प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया गया है जो इस प्रकार हैः-
‘‘कि यह बैठक सिफारिश करती है कि भारत में बिजली के विकास को सरकारी
या अर्ध-सरकारी उपक्रम बनाया जाए और उन तत्वों का उन्मूलन किया जाए जो
प्रांत, राज्य अथवा स्थानीय शासन के स्वस्थ बिजली विकास में बाधक हैं या
व्यावसायिक उपक्रमों के विकास को कुप्रभावित करते हैं।’’
यह अनुभव किया गया है प्रारूप प्रस्तुत बहुत स्पष्ट नहीं था। इसमें ऐसे उपक्रमों के विषय में कुछ नहीं कहा गया था जो पहले ही अस्तित्व में आ चुके थे। वास्तव में उन तत्वों के नियंत्रण की बात कही गई थी जिनसे बिजली का स्वस्थ विकास रुकता है। किंतु यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि वे कौन से तत्व है। इसलिए यह