214 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
आवश्यक समझा गया कि प्रस्ताव पर नीति समिति में फिर से ध्यानपूर्वक विचार किया जाए ताकि संदेह दूर हो सके। इसलिए मद संख्या 1 इस रूप में लाया गया।
सरकारी नियंत्रण और स्वामित्व
नीति समिति की पिछली बैठक में जो विचार-विमर्श हुआ उसमें इस इरादे को स्पष्ट करने पर विचार किया गया कि जहां बिजली आपूर्ति का कोई प्रतिष्ठान नहीं है वहां सरकारी अथवा अर्ध-सरकारी उपक्रमों द्वारा बिजली का उत्पादन किया जाए, परंतु इस विषय में फिर भी यह संदेह बना रहा कि जहां बिजली प्रतिष्ठान मौजूद हैं वहां सरकारी उपक्रम आएं या नहीं। उदाहरणार्थ क्या यह उचित रहेगा कि सामान्यतः राज्य या दूसरे प्राधिकरण के पास इस बात का विकल्प रहे कि वह किसी उपक्रम का अधिग्रहण कर लें जहां व्यक्तिगत लाइसेंस की शर्तों में यह विकल्प है। क्या क्षेत्रीय विकास या बिजली उत्पादन और आपूर्ति पर नियंत्रण रखने के लिए मौजूदा निजी स्वामित्व के प्रतिष्ठानों को सरकारी नियंत्रण में लेना युक्तिसंगत है? क्षेत्रीय विकास के लिए कुछ अन्य प्रतिष्ठानों से थोक बिजली लेना आवश्यक हो सकता है। इसके लिए उन प्रतिष्ठानों को मौजूदा प्रतिष्ठानों की तरह चलाया जाना होगा और सामान्य योजना के तहत एक ही रास्ते पर लाया जाएगा। इस प्रकार हमें आशा है कि इस विचार-विमर्श के दौरान न केवल इस दृष्टि से कि उन्हें किस सीमा तक सरकारी स्वामित्व में लाया जाए बल्कि इस दृष्टि से भी स्पष्टीकरण होना चाहिए कि सरकार उन मामलों में कितना नियंत्रण रखे जहां सरकारी स्वामित्व फिलहाल संभव नहीं है।
‘‘जेवंस’’ का आथि्र्ाक मानदंड
सरकारी और गैर-सरकारी उपक्रमों का मामला सदा विवाद में रहा। इस समय यह विवाद पूरे जोरों पर है क्योंकि हमने नियोजित अर्थव्यवस्था आरंभ कर दी है। ओल्ड जेवंस ने अपने लेख राज्य बनाम उद्योग में सरकार और उद्योगों के संबंध में कुछ आर्थिक मानदंड बनाने का प्रयत्न किया है जो सरकारी उद्यमों और निजी उद्यमों के बीच लक्षमण रेखा का काम करें। परंतु ये सरकारी उद्यमों के सिद्धांत के विरोधी हैं। जेवंस के अनुसार चार मानदंड हैं जो उद्योगों में सरकार के लिए नियत हैं। वे हैंः (1) लघु पूंजी लेखा (2) सामान्य संचालन (3) डाक तार और टेलीफोन जैसी सेवाओं का समय और (4) बिजली और गैस सप्लाई जैसी बहुउद्देशीय आवश्यकताएं।
इस देश में जेवंस के अनुयाइयों ने प्रस्ताव किया है कि कुछ और मानदंड निश्चित किए जाएं जिनका उद्देश्य सरकारी उपक्रमों का क्षेत्र एक को छोड़कर अन्य मामलों में सीमित कर दिया जाए। जैसे, वे उन क्षेत्रों में सरकारी दखल का विस्तार करने के