भारत के खनिज साधनों पर सरकार की नीति
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बात शिकायत का आधार हो सकती है। परंतु इसमें आश्चर्य की बात नहीं है। खनिज नीति न होने की जिम्मेदारी कुछ लोग भूगर्भ सर्वेक्षण पर डालना चाहते हैं। मेरा विचार है कि यह आरोप गलत है और मैं इस बात पर ही पहले कुछ मिनट बोलूंगा और इन धारणाओं को दूर करने की कोशिश करूंगा।
मैं समझता हूं कि यह स्वीकार किया जाना चाहिए कि किसी भी सरकार की
खनिज नीति उसकी औद्योगिक नीति पर निर्भर है। खनिज आवश्यक रूप से देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और यदि किसी देश की औद्योगिक नीति नहीं होती तो अवश्य ही उसकी खनिज नीति भी नहीं हो सकती। सदन इस बात से अवगत है कि जब युद्धोत्तर काल के लिए भारत सरकार ने आर्थिक पुनर्निर्माण के लक्ष्य और उद्देश्य निर्धारित किए उससे पूर्व इस देश के आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्र में उद्योगीकरण के लिए सरकार की भूमिका बहुत अल्प मात्रा में थी।
डॉ. पी.एन. बनर्जीः कितने खेद की बात है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः चाहे यह खेद की बात हो या क्षोभ की, इस समय यह मेरी चिंता नहीं है। मैं तो सिर्फ इतना कहना चाहूता हूं कि कोई खनिज नीति नहीं है। इसमें भूगर्भ सर्वेक्षण की कोई गलती नहीं, यह गलती सरकार की है, व्यवस्थापिका की भी हो, और शायद उन संगठनों की भी हो सकती है जिनकी देश के आर्थिक और औद्योगिक जीवन में रुचि थी।
भूगर्भ सर्वेक्षण वह भूमिका नहीं निभा सका जो विश्व के अन्य भागों में भूगर्भ सर्वेक्षणों ने निभाई है, इसका दूसरा कारण यह है कि यह एक ऐसा विभाग है जिसमें कार्मिकों की संख्या आवश्यकता से कम है। मैं सदन को इसके कर्मचारियों और तकनीकी कार्मिकों के संबंध में संक्षेप में बताना चाहता हूं। 1920 में भूगर्भ सर्वेक्षण के वरिष्ठ तकनीकी राजपत्रित अधिकारियों की संख्या बढ़ाने की स्वीकृति ली गई थी। दुर्भाग्य से प्रशिक्षित कार्मिकों की नियुक्ति में बहुत किइनाइयां सामने आईं। वांछित कर्मचारी नियुक्त करने में नौ वर्ष लग गए। दुखद बात यह हुई कि जैसे ही ये पद भरे गए, 1931 में व्यवस्थापिका ने मितव्ययता बरतने का प्रस्ताव पास कर दिया और लगभग उन सभी कर्मचारियों को हटाना पड़ा। मैं यह बताना चाहता हूं कि यदि भूगर्भ सर्वेक्षण भारत सरकार की खनिज नीति में कोई भूमिका नहीं निभा सका तो कुछ हद तक व्यवस्थापिका पर भी इसका उत्तरदायित्व है।
मेरे पास सीमित समय है। मैं अतीत की बातें कहीं कहना चाहता। मैं भविष्य के बारे में बताऊंगा। मुझे यह कहने में प्रसन्नता हो रही है कि अब भारत सरकार ने एक निश्चित खनिज नीति की आवश्यकता स्वीकार कर ली है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत सरकार ने फैसला किया है कि देश में उद्योगीकरण का अभियान