220 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
चलाया जाए। भारत सरकार की खनिज नीति का उल्लेख पुनर्निर्माण और नियोजन संबंधी दूसरी रिपोर्ट की धारा 14 में है। मेरे पास धारा 14 पढ़ने और न ही उसका सार संक्षेप देने का समय है। मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं कि सदन के जो सदस्य इस मामले में रुचि रखते हैं वे स्वयं धारा 14 देख लें कि यह नीति क्या है।
अपनी बात का संक्षिप्त करते हुए मुझे कहना है कि इस विषय के दो भाग हैं- भारत सरकार की खनिज नीति और भारत सरकार द्वारा उस नीति पर प्रस्तावित कार्यक्रम। पहली बात तो यह है कि इस नीति को आगे बढ़ाने के लिए हमारा प्रस्ताव भूगर्भ सर्वेक्षण को पुनर्गठित करने का है। तदनुसार सर्वेक्षण के विस्तार हेतु एक विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया गया है जिसकी प्रशासनिक पुष्टि हो चुकी है। हमारा प्रस्ताव भूगर्भ सर्वेक्षण की और शाखाएं गठित करने का है जिनका संबंध अभियांत्रिक भूगर्भ
खनिजों के औद्योगिक उपयोग, केंद्रीय खनिज विकास, भू-भौतिकीय कार्य और तेल विकास से होगा। एक प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय और प्रचार अनुभाग की स्थापना भी की जाएगी ताकि गतिविधियों से जनता को अवगत कराया जा सके।
हमारी खनिज नीति का दूसरा अंग खनिजों के नियंत्रण के उद्देश्य से कानून तैयार करना है जिसमें निम्न बातों पर ध्यान रखा जाएगाः पहली, रक्षा की दृष्टि से अखिल भारतीय स्तर पर खनिज का महत्व_ दूसरे_ खनिजों का तकनीकी पक्ष_ तीसरी _ खनिजों के उपयोग का उद्देश्य_ चौथी, खनिजों अथवा खनिज उत्पादों का मूल्य। हमारा कानूनी प्रावधान दो भागों में होगा, या कहिए कि खनिजों के दो वर्गों में विभाजित किया जाएगा ः एक तो वे जो हमारे सामान्य नियंत्रण में होंगे और इसमें हमारा काम खनिज निकालने तथा खनिजों की खुदाई के लिए पट्टे देने उन लाइसेंसों की शर्तें तय करने तथा लाइसेंस रद्द करने के अधिकार तक सीमित होगा, और दूसरे खनिज ऐसे होंगे जिन पर हमारा विस्तृत नियंत्रण होगा। जिन खनिजों पर हमारा विस्तृत नियंत्रण का सुझाव है वे लगभग 28 होंगे। मैं उनके विषय में विस्तार से नहीं बता रहा हूं। विस्तृत नियंत्रण में लाइसेंस देने का अधिकार खदान के तरीकों, प्रक्रिया, श्रेणीकरण, मानकीकरण, नियंत्रित करने का अधिकार होगा ताकि खदान और माल निकालने में सुधार हो सके। अधिक उपयोगिता के उद्देश्य से इसमें गवेषणा का अधिकार तथा अन्य उद्देश्य शामिल हैं।
उपलब्ध समय सीमा में मैंने संक्षेप में उस सामान्य नीति का उल्लेख किया है जो खनिजों के बारे में भारत सरकार बनाना चाह रही है।
अब मैं कुछ उन विशेष मुद्दों पर आना चाहता हूं जो श्री नियोगी ने मुझे लिखित सूचना में दिए हैं। उनका पहला मुद्दा है खनिजों को निर्यात करना। मैं सदन को विश्वास दिलाऊंगा कि प्रस्तावित कानून में निस्संदेह ऐसा प्रावधान होगा जिसका संबंध
खनिजों के निर्यात से होगा। वास्तविक प्रश्न यह है कि क्या हम अपने खनिजों का