222 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मैंने सामान्य तौर पर और अल्पावधि में बता दिया है कि भारत सरकार की नीति क्या है। अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि व्यापक और गतिशील नीति तीन परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यह भारत के औद्योगिक अभियान पर निर्भर करेगी। यदि उद्योगीकरण होता है तो इस देश को पहले की अपेक्षा और बलवती खनिज नीति बनानी होगी। हमारी खनिज नीति की सफलता और इससे बहुत से लोगों का लाभ भी दो बातों पर निर्भर करेगा, एक तो संवैधानिक स्थिति अर्थात केंद्र तथा प्रांतों के बीच अधिकारों का वितरण, और सरकार को क्या भूमिका निभाने दी जाती है। मुझे विश्वास है कि मैंने सदन को देश की प्रस्तावित खनिज नीति के विषय में काफी बता दिया है।
एक माननीय सदस्यः मेरा प्रस्ताव है कि प्रश्न रखा जाए।
उपाध्यक्ष महोदय (श्री अखिल चंद्र दत्ता)ः प्रश्न यह हैः
‘‘कि अब प्रश्न रखा जाए।’’
(कई माननीय सदस्यः नहीं, नहीं)
मैं समझता हूं कि सदन की आम राय यह है कि प्रश्न अभी न रखा जाए।
एक माननीय सदस्यः आप बहस स्थगित कर सकते हैं।
श्री एच. ए. सत्तार, एच. इशाक सेत (पश्चिमघाट और नीलगिरीः मुस्लिम)ः जो व्यवस्था रखी गई है और परिचालित की जा चुकी है उसके अनुसार नेशनलिस्ट पार्टी को दिया गया समय समाप्त हो गया है। उसके लिए गिलोटीन की स्थिति है। अब अन्य दलों की बारी है। सदन इस पर विचार प्रकट नहीं कर सकता।
उपाध्यक्ष महोदय (श्री अखिल चंद्र दत्ता) स्थिति यह है कि यह कटौती प्रस्ताव सदन में नहीं रखा जा सकता।