224 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अपना वक्तव्य कमोबेश टैलीग्राफ की भाषा में दिया है, उसमें विभक्तियां नहीं हैं, संयोजक और नियोजक भी नहीं है और अपने निष्कर्षों में कोई ठोस तर्क भी प्रस्तुत नहीं किए हैं और उनके प्रस्ताव का उत्तर देने में मुझे कुछ कठिनाइयां हैं। फिर भी मैं उनको आरोपों का उत्तर देने का पूरा प्रयत्न करूंगा।
श्रीमन्, श्रम विभाग पर उनका पहला आरोप मंहगाई भत्ते के बारे में है। उनका लांछन है कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित किया गया मंहगाई भत्ता अपर्याप्त है। भारत सरकार ने जो मंहगाई भत्ता स्व्ीकार किया है उसमें समानता नहीं है। उनकी पहली बात के विषय में, मैं सोचता हूं कि पर्याप्तता का अर्थ अलग-अलग लगाया जाता है। यह मुश्किल होगा कि कोई भी दो व्यक्ति किसी रकम के बारे में सहमत हों कि वह पर्याप्त है। इसलिए मैं इस मामले में पड़ना नहीं चाहता। मैं तो सदन का ध्यान इस ओर दिलाना चाहता हूं कि भारत सरकार ने मंहगाई भत्ते पर काफी रुचि ली है और वह स्थिति पर नजर रखे हुए है। इस बात पर भी कोई विवाद नहीं है कि सरकार ने समय-समय पर मंहगाई भत्ता बढ़ाया है। मैं सदस्यों को कुछ तथ्य बताता हूं। मैं याद दिलाना चाहता हूं कि पहली बार मंहगाई भत्ता अगस्त 1942 में दिया गया था। जनवरी, 1943 में इसमें फिर वृद्धि की गई। जून, 1943 में इसमें फिर वृद्धि की गई। (एक माननीय सदस्यः ‘‘1942 में कितना मंहगाई भत्ता दिया गया?’’) इसके विस्तार में जाने का समय मेरे पास नहीं है, और मुझे आशा है कि माननीय सदस्य मुझे आगे बोलने देंगे। मार्च, 1944 में इस में फिर वृद्धि की गई। हमने केवल भत्ता ही नहीं बढ़ाया है, बल्कि समय-समय पर हमने अधिकतम आय राशि भी बढ़ाई है जिस पर कर्मचारी मंहगाई भत्ते का अधिकारी होता है। पहली बार जब मंहगाई भत्ता दिया गया था तो यह राशि 100 से 200 रुपए थी। तीसरी बार में इसे 150 रुपए कर दिया गया और चौथी बार यह सीमा 250 रुपए कर दी गई। क्या मैं सदन को बता सकता हूं कि सरकार मंहगाई भत्ते में और वृद्धि पर विचार कर रही है और मुझे आशा और विश्वास है कि इस मामले पर भारत सरकार का फैसला जल्दी ही लागू कर दिया जाएगा।
जहां तक एकरूपता के अभाव का प्रश्न है, मैं मानने को तैयार हूं कि कोई एकरूपता नहीं है और विविध वर्गों के कर्मचारियों को अलग-अलग भुगतान किया जाता है। परंतु प्रश्न यह है कि एकरूपता के लिए जिम्मेदार कौन है? मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि मंहगाई भत्ते में एकरूपता के अभाव के लिए यदि कोई जिम्मेदार है तो वह स्वयं श्री जोशी हैं।
श्री एन. एम. जोशीः कैसे? मैं तो सरकार नहीं हूं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः जब मैं श्री जोशी कहता हूं तो मेरा तात्पर्य