228 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और वह अपवाद है कि अवज्ञापूर्ण आचरण के लिए वह कर्मचारी को हटा सकता है। श्रीमन्, मैं ऐसा नहीं सोचता कि यह प्रावधान विशेष जिससे कोई मालिक अपने ऐसे कर्मचारी से मुक्ति पा सकता है जो दुर्व्यवहार करता है और अवज्ञा करता है तो इसमें कोई शिकायत का आधार बनता हो।
एन. एम. जोशीः इसका फैसला कौन करता है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं श्री जोशी से पूछना चाहूंगा कि जिन आम मामलों में न्यायाधिकरण की आवश्यकता नहीं है, वहां कौन निर्णय करता है? जिस ढंग से हमारे उद्योग चलते हैं, सहीं हों या गलत, किसी कर्मचारी को मालिक ही बर्खास्त करता है जिसके विषय में वह सोचता है कि उसकी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है। इसलिए मैं समझता हूं कि इस बात में कोई सार नहीं हैं। परंतु मैं सदन और विशेषतः श्री जोशी को बताना चाहता हूं कि हमने अध्यादेश को दो महत्वपूर्ण मामलों में संशोधित किया है ताकि इसका दुरुपयोग न हो सके। पहली चीज जो हमने श्री जोशी की इच्छानुसार की है वह है न्यायाधिकरण के साथ एक परामर्श समिति को संबद्ध करना। इन परामर्श समितियों में श्रम प्रतिनिधि भी रखे गए हैं और इसे रंचमात्र भी संदेह नहीं है कि जिस प्रकार इन समितियों का गठन किया गया है उससे न्यायधिकरण का ध्यान उस मामले की ओर दिलाया जा सकेगा जिनमें बदले की भावना निहित हो।
दूसरा और अत्यधिक महत्वपूर्ण उपाय जो हमने किया है वह यह है कि हमने न्यायाधिकरण के लिए आदेश जारी किए हैं कि यदि कर्मचारी को त्यागपत्र देने या नौकरी छोड़ने की अनुमति देने से इंकार किया गया है तो उसके कारणों को दर्ज किया जाए। यह एक ऐसा प्रावधान है जिसे हमने दंड प्रक्रिया संहिता से लिया है ताकि सरकार को यह जानना संभव हो सकेगा कि क्या किसी कर्मचारी को त्यागपत्र की अनुमति न देने के बारे में न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के पास कोई वैध और समुचित कारण है।
श्रीमन्, श्री जोशी ने मुद्दा पेश किया है कि कोयला खदानों में स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। मैं यह दावा नहीं करता कि वहां स्थिति बहुत अच्छी है। मैं नहीं कहता कि श्रम विभाग ने कोयला खदानों में बेहतर स्थिति के लिए कोई निश्चित कदम उठाए हैं। हमारे कोयला खदानों में दो प्रकार के श्रमिक हैं - स्थानीय श्रमिक और बाहर से बुलाए गए श्रमिक, खासतौर से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के। मैं सदन को उनके वेतनों के विषय में बताना चाहता हूं। गोरखपुर के श्रमिकों को प्रतिदिन बारह आने मूल वेतन मिलता है। इसके साथ ही उसे चार आने उत्पादन बोनस के रूप में