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भारत सरकार की श्रम नीति

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मिलते हैं। भूमिगत कार्य करने पर उसे चार आने अतिरिक्त मिलते हैं। उसे निःशुल्क भोजन मिलता है जिसकी लागत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 14 आने बैठती है।

श्रीमती रेणुका रे (मनोनीत गैर-सरकारी)ः श्रीमन्, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है। मैं समझती हूं माननीय सदस्य ने 25 मिनट का समय पहले ही ले लिया है।

उपाध्यक्ष महोदय (श्री अखिल चंद्र दत्त)ः प्रभारी माननीय सदस्य 20 मिनट से अधिक बोल सकते हैं।

श्री एन. एम. जोशीः नियम 20 मिनट का है।

उपाध्यक्ष महोदय (श्री अखिल चंद्र दत्त)ः नहीं, 20 मिनट या आवश्यक होने पर अधिक भी।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, जैसा कि मैंने कहा, इस वेतन के अतिरिक्त गोरखपुर के श्रमिक को 14 आने प्रतिदिन भोजन के लिए मिलते हैं। उसे निःशुल्क आवास और चिकित्सा सहायता मिलती है।

अब मैं अन्य खदानों पर आता हूं। उनके वेतन की स्थिति इस प्रकार हैः उनके नकद वेतन में 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। युद्ध पूर्व सतह पर उनका वेतन 8 आना और भूमिगत के लिए 14 आना था। उसे कुछ राशन भी दिया जाता है। प्रति स्थानीय खदान मजदूर को चार सेर अनाज नियंत्रित मूल्यों पर स्वयं के लिए मिलता है। चार सेर प्रति वयस्क आश्रित के लिए और दो सेर प्रति अवयस्क के लिए जिसकी आयु दो से बारह वर्ष के बीच हो। इसके साथ ही, उसे रियायती दरों पर 6 सेर प्रति रुपए के हिसाब से अनाज और दालें मिलती हैं। उपस्थिति वाले प्रतिदिन एक सेर चावल मिलता है। जिस श्रमिक का कोई आश्रित नहीं है, उसे प्रतिदिन दो आने और एक आश्रिमक होने पर तीन आने और एक वयस्क आश्रित तथा एक या अधिक बच्चे होने पर पांच आने प्रतिदिन मिलते हैं।

श्री श्री प्रकाशः श्रीमन्, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है। आपने कहा कि किसी सरकारी सदस्य को 20 मिनट से अधिक दिए जा सकते हैं। यह अधिक समय संबद्ध प्रभारी सदस्य को दिया जाता है। हरेक सरकारी सदस्य को नहीं जो बीच में ही बोले। इस विषय में संबद्ध सरकारी सदस्य वित्त सदस्य हैं, जिनका प्रस्ताव सदन के सम्मुख है। यह प्रस्ताव श्रम सदस्य का नहीं है।

श्री सामी वेंकटचलम चेट्टी (मद्रासः भारतीय वाणिज्य)ः श्रीमन्, मेरा प्रस्ताव है कि प्रश्न प्रस्तुत किया जाए।

कई माननीय सदस्यः अब प्रश्न प्रस्तुत किया जाए।