41. खानों की महिलाओं को भूमिगत काम देने पर से हटाए गए प्रतिबंध को पिफर लगाए जाने की आवश्यकता - Page 257

232 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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ऽखानों में महिलाओं को भूमिगत काम देने

पर से हटाए गए प्रतिबंध को फिर लगाए

जाने की आवश्यकता

श्रीमती रेणुका रायः श्रीमन्, मैं प्रस्ताव करती हूंः

‘‘कि श्रम विभाग की मांग में से सौ रुपए की कटौती की जाए।’’

श्रीमन्, अगस्त, 1943 से जब से खानों में महिलाओं को भूमिगत काम देने पर लगा हुआ प्रतिबंध हटाया गया है तब से ही देश में इस अवांछित काम का लगातार जोरदार विरोध किया जा रहा है। भारत सरकार इस बात से पूरी तरह अवगत है कि उसने अंतर्राष्ट्रीय संकल्प का उल्लंघन किया है परंतु इसने बहुत आघात पहुंचाया है और विश्व जनमत का अनादर किया है।

एक साल पहले अखिल भारतीय महिला सम्मेलन के अनुरोध पर मैंने दुबारा तुरंत प्रतिबंध लगाए जाने की मांग में एक कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश किया था और बजट सत्र में मेरे माननीय मित्र श्री सुब्बारायण भी एक कटौती प्रस्ताव पर बोले थे। पंरतु उस समय माननीय श्रम सदस्य की दलील थी कि यह एक बहुत अल्पकालिक उपाय है और अगले कटाई के मौसम तक ही चलेगा। उनका कहना था कि यह पूरे युद्धकाल के लिए नहीं की गई है, श्रमिकों के अभाव के कारण की गई है और अभाव दूर करने की व्यवस्था की जा रही है तथा श्रमिकों का अभाव दूर होते ही प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे। श्रीमन्, एक साल बीत गया है पर मैं समझती हूं कि रवैया और भी कड़ा हो गया है। माननीय श्रम सदस्य ने यह स्पष्ट ही कर दिया है कि उनका इरादा प्रतिबंध लगाने का नहीं है। इस सदन के माननीय सदस्य सभी परिस्थितियों से भली भांति अवगत हैं और उन्हें इसका पूरा अहसास होगा कि जो दलीलें दी गई हैं वे निर्दयी पूंजीवादी मालिकों की ओर से दी गई दलीलें समझी जा सकती हैं।

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 2, 13 मार्च, 1945, पृष्ठ 1463-66