41. खानों की महिलाओं को भूमिगत काम देने पर से हटाए गए प्रतिबंध को पिफर लगाए जाने की आवश्यकता - Page 258

खानों में महिलाओं को भूमिगत काम देने पर से हटाए गए प्रतिबंध

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इस समय अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम) ने पुनः अपना आसन ग्रहण किया।

परंतु जिन पर मुख्यतः आम जनता के संरक्षण और कल्याण का दायित्व है वे इसका समर्थन कैसे कर सकते हैं यह समझ में नहीं आता।

श्रीमन्, मैं सदन के सभी सदस्यों का समर्थन चाहती हूं - सभी सदस्यों का, चाहे वे इस पक्ष् के हों या दूसरे पक्ष के। सरकारी और अन्य सभी दलों का, क्योंकि यह बहुत जायज मांग है जिसकी अनदेखी करना मानव शिष्टता के मूल सिद्धांत का उल्लंघन है।

श्रीमन्, मैं प्रस्ताव रखती हूं।

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम) कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुआः

‘‘कि श्रम विभाग की मांग में से सौ रुपए की कटौती की जाए।’’

कुछ माननीय सदस्यः अब प्रश्न रखा जाए।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मेरे लिए इतने कम समय में इस कटौती प्रस्ताव पर समुचित प्रकाश डालना कठिन है। मैंने पिछली बार इस विषय पर कार्य स्थगन प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा था कि भारत सरकार ने जो फैसला किया है उस पर मुझे बहुत अप्रसन्नता है और मैं आज भी उससे अप्रसन्न हूं। किंतु परिस्थितियां ऐसी है कि इसके अलावा कोई कदम उठाना असंभव था जो हमने उठाया। यदि सदन कुछ मिनट तक मेरी बात सुनने का धैर्य रखे तो .........

कुछ माननीय सदस्यः नहीं, नहीं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं सदन को उन प्रासंगिक परिस्थितियों के विषय में बताऊंगा जिनके कारण हमें इस पर विवश होना पड़ा।

मैं शुरू में सदन को यह बताना चाहता हूं कि कोयले की स्थिति क्या है। 1941 में कुल निकासी 29,381,000 टन थी। 1942 में वह गिर कर 29,270.000 टन हो गई और 1943 में यह मात्र 23,753.000 टन रह गई। इसी संकटपूर्ण वर्ष में यह कमी 6,62,80000 टन तक पहुंच गई। मैं यह बताना आवश्यक नहीं समझता कि कोयला बहुत महत्वपूर्ण कच्चा माल है, उद्योगों की दृष्टि से भी और युद्ध प्रयत्नों के लिए भी। किसी भी सरकार के लिए यह असंभव था कि वह हाथ पर हाथ धरे बैठी रहे और उत्पादन में इतनी गिरावट की अपेक्षा कर दे, वह भी कोयले जैसे महत्वपूर्ण पदार्थ की।