41. खानों की महिलाओं को भूमिगत काम देने पर से हटाए गए प्रतिबंध को पिफर लगाए जाने की आवश्यकता - Page 259

234 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अगली जो बात जिस पर मैं सदन का ध्यान दिलाना चाहता हूं वह है इन वर्षों में शुरू की गई नई खदानों की संख्या । 1941 में खदानों की कुल संख्या 440 थी। 1942 में यह संख्या 670 हो गई और 1943 में वह 706 तक पहुंच गई। साधारण परिस्थितियों में 1943 में खदानों की बढ़ी हुई संख्या के बाद हमें उस मात्रा से बहुत अधिक कोयला मिलना चाहिए था जो हमें प्राप्त हुआ, परंतु हमारे सामने चिंताजनक स्थिति आई। एक ओर खदानों की संख्या में 366 की वृद्धि हुई तो दूसरी ओर कोयले के उत्पादन में 6,628,000 टन की कमी आ गई।

अब हम श्रमिकों की स्थिति पर दृष्टि डालें। 19541 में कोयला खदानों में श्रमिकों की संख्या 2,11,601 थी, 1942 में यह 2,08,742 थी और 1943 में यह संख्या 2,05,822 रह गई। नई खदानों के संदर्भ में यह एक अजीब हालत थी, अर्थात खदानों की संख्या में वृद्धि परंतु श्रमिक संख्या में गिरावट। दरअसल यह कमी 4879 श्रमिकों की थी। परंतु कहानी यहीं समाप्त नहीं होती। बहुत से लोगों को यह मालूम नहीं है कि वास्तविक तथ्य क्या है। यदि सदन को यह बताया जाए तो उसे अहसास हेगा कि कोयला काटने वालों की जो संख्या 55691 थी, वह 1942 में घटकर 51438 रह गई। 1943 में वह और कम होकर 45306 ही रह गई। इस तरह 10385 की कमी आई। मैं सदन को यह बताने की आवश्यकता अनुभव नहीं करता कि कोयले की संपूर्ण प्रक्रिया में कोयला काटने वालों का महत्वपूर्ण स्थान है। खदानों में कोयला काटने वालों के अभाव में अन्य श्रमिकों की भरमार से कोई लाभ नहीं क्योंकि वही मूल कार्य है। सारी समस्या का केंद्र यही है।

ये कोयला कटर कम क्यों हुए, वास्तव में सदन इससे भलीभांति अवगत है। जहां कोयला खदानें हैं, वहां विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों की बहुत संभावनाएं उत्पन्न हुई हैं। इनमें विभिन्न सैनिक कार्य, वैकल्पिक रोजगार शुरू हो रहे हैं। कोयला खानों की अपेक्षा वहां वेतन काफी अच्छे हैं। वैकल्पिक रोजगार में और भी लाभ हैं जैसे यह कार्य भूमि सतह पर होता है जो भूमिगत कार्यों की अपेक्षा निस्संदेह अधिक आकर्षक है। कोयला काटने वाले अपने कार्य की जगह भूमितल पर ही दूसरा काम करना इसलिए भी पसंद करते हैं कि वे अपनी पत्नियों को भी साथ रख सकते हैं और इस तरह अपनी और अपने परिवार की आमदनी भी बढ़ा सकते हैं। यदि वह खान में कार्य करता है तो वह स्त्रियों के खान में काम करने पर लगे प्रतिबंध के कारण अपनी पत्नी को मिलने वाले काम के लाभ से वंचित रह जाता है। शायद यही सबसे बड़ा कारण है कि कोयला काटने वाले खानों को छोड़ रहे हैं और आसानी से मिलने वाले वैकल्पिक रोजगार तलाश कर लेते हैं।