41. खानों की महिलाओं को भूमिगत काम देने पर से हटाए गए प्रतिबंध को पिफर लगाए जाने की आवश्यकता - Page 260

खानों में महिलाओं को भूमिगत काम देने पर से हटाए गए प्रतिबंध

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मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं है कि कोयला काटने वाले को वापस बुलाने का इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं कि उसे अवसर दिया जाए कि उसकी पत्नी उसके साथ रहे और वेतन भी कमाए। हमसे कहा गया कि पुरानी स्थिति लाने का एक और साधन है - यदि हमें कोयला कटर को वापस बुलाना है तो हम उनका वेतन बढ़ा दें। इस मुद्दे पर मैं कहना चाहूंगा कि इस तर्क में सीमित बल हैं, परंतु इसे लागू करना व्यर्थ होगा। कल मेरे मित्र श्री जोशी ने कहा कि इंग्लैंड में कोयला मजदूरों को अधिक वेतन दिया जाता है और यह उद्योग बहुत अच्छा वेतन देने वाले उद्योगों में है। निस्संदेह यह सही हैं। किन्तु श्री जोशी एक वास्तविकता भूल गए कि इंग्लैंड में भी जहां कोयला श्रमिकों को इतना अधिक वेतन दिया जाता है, वहां भी कोयला

खदान मजदूरों का अभाव है। इसलिए श्रीमन्, बात यह है कि यह जो उपाय बताया गया है पूरी तरह प्रभावशाली नहीं है। हमारी समझ में इस बदतर और बहुत गंभीर स्थिति से निपटने के लिए जो उपाय किया गया है वही एक उपाय बचा था।

सरकार के फैसले के बारे में एक और मुद्दा उठाया गया है। मैं ईमानदारी से उस पर बताऊंगा क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और मैं स्वीकार करता हूं कि इसमें वजन भी है। मैंने सदा इस बात पर विचार किया कि इंग्लैंड में कोयले का अभाव है और अन्य देशों में जब स्त्रियों को भूमिगत कार्यों में क्यों लगाएं? इसका उत्तर दो प्रकार से दिया जा सकता है। पहला यह कि इंग्लैंड जैसे देशों में जहां स्त्रियां को भूमिगत कार्यों में नहीं लगाया जाता वहां उनके लिए वैकल्पिक कार्य हैं। वे पुरुषों पर जोर डाल सकती हैं और डालती भी हैं कि वे कोयला खदानों में कार्य करें। मैंने हाल ही में एक समाचार पढ़ा था कि 1941 में बेल्जियम में पुरुषों का सेना के लिए भर्ती किया गया, परंतु इसके बजाए उन्हें वहां की सरकार ने कोयला खदानों में भेज दिया। सदन को यह अहसास होगा कि वह अधिकार हमारे पास नहीं हैं और इसलिए हम समस्या का वह निदान नहीं निकाल सके।

श्रीमन्, मेरा दूसरा उत्तर इस प्रकार है। ग्रेट ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ऐसे अन्य देशों में स्त्रियों के भूमि के अंदर काम करने की परंपरा नहीं है। उनकी स्त्रियां यह कार्य करती थीं, किन्तु 60-70 साल पहले। मैं सदन से अपील करता हूं कि वह वास्तविक रवैया अपनाएं। क्या यह वास्तविकता नहीं है कि हमारे देश में 1937 तक स्त्रियां कोयला खानों में काम करती थी? क्या यह सत्य नहीं है कि हमारे देश में आठ वर्ष पहले तक स्त्रियां कोयला खदानों में काम करती थीं? क्या भारत में कोई कह सकता है कि जैसाकि इंग्लैड के लोग कहते हैं, कि उनकी महिलाओं ने जमीन के भीतर एक शताब्दी से काम नहीं किया है और इसलिए यह नई बात है।