41. खानों की महिलाओं को भूमिगत काम देने पर से हटाए गए प्रतिबंध को पिफर लगाए जाने की आवश्यकता - Page 261

236 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मैं समझता हूं कि जिस माननीय महिला ने कटौती प्रस्ताव पेश किया है वह उन विचारों को भूल गई है। जो 1934 अखिल भारतीय महिला सम्मेलन में प्रकट किए गए थे। मैं उन्हें सदन के सम्मुख प्रस्तुत करूंगा। भारत सरकार ने 1929 में महिलाओं के जमीन के अंदर कार्य करने बंद करने के व्यावहारिक कदम उठाए थे और, जैसाकि सदन को याद होगा, एक व्यवस्था की गई थी जिससे कि महिलाएं उस कार्यक्रम के अनुसार 1937 से खान में भूमि के अंदर काम नहीं कर सकती हैं। यह सम्मेलन के काफी पहले की बात है। अखिल भारतीय महिला सम्मेलन का क्या रुख था? मुझे पता चला कि अखिल भारतीय महिला सम्मेलन ने 26 दिसम्बर, 1934 को इस पर विचार किया। मेरे हाथ में जो रिपोर्ट है (श्रीमती रेणुका राय द्वारा व्यवधान) कृपया बीच में न बोलें। अखिल भारतीय महिला सम्मेलन ने इस प्रश्न पर विचार करने के लिए एक समिति बनाई और मैं अखिल भारतीय महिला सम्मेलन द्वारा भारत सरकार के कदम पर प्रकट किए गए विचारों से संबद्ध दो वाक्य पढ़ना चाहता हूं। मैं पृष्ठ 53 से पढ़ता हूं। रिपोर्ट में पहले इसके लाभ और फिर हानियां बताई गई हैं। रिपोर्ट में मैं सदन को बताना चाहूंगा कि वह महिला जिन्होंने प्रस्ताव पेश किया था अखिल भारतीय महिला सम्मेलन द्वारा नियुक्त समिति की सदस्या थीं शुरू में ही यह कहा गया हैः-

‘‘महिलाओं को जमीन के भीतर काम करने से रोकने पर हमारी धारणा है कि

कुल मिलाकर यह उन दशाओं के अनुकूल नहीं है जिसमें खनिज रहते हैं।’’

रिपोर्ट में उन्होनं अंत में कहाः

‘‘यदि मौजूदा हालात में महिलाओं को भूमितल से नीचे काम करने से रोका

गया तो खनिकों के परिवारों के लिए जो संकट पैदा होगा वह स्त्रियों के भूमिगत

काम करने से बढ़कर होगा।’’

(श्रीमती रेणुका राय द्वारा व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः माननीय सदस्य बीच में रुकावट के लिए तैयार नहीं है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, यह सच है कि अखिल भारतीय महिला सम्मेलन के अधिवेशन में उपरोक्त निष्कर्ष निकाला गया, इस सत्य के बावजूद कि भारत सरकार के निर्णय पर उन्हें गहरी आपत्ति थी, उन्होंने निश्चय किया कि वे अंतर्राष्ट्रीय कंवेशन का समर्थन करेंगी। 1935 में अखिल भारतीय महिला सम्मेलन ने जो रुख अपनाया वह उसके 1934 के रवैये से इतना भिन्न उक्त कंवेशन के कारण था और मुझे विश्वास है कि यदि 1935 में अंतर्राष्ट्रीय कंवेशन पास नहीं होता तो