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ऽश्रम विभाग
माननीय सर जेरेमी राइसमैनः मैं प्रस्ताव करता हूंः
‘‘कि 31 मार्च, 1945 को समाप्त होने वाले वर्ष के दौरान श्रम विभाग के
संबंध में किए जाने वाले भुगतानों के लिए 2,40,000 रुपए से अनधिक की
अनुपूरक राशि गवर्नर जनरल इन कौंसिल को प्रदान की जाए।’’
सभापति महोदय (सैयद गुलाम भिक नैरंग) प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ।
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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः (श्रम सदस्य)ः जैसाकि मेरे मित्र प्रो. रंगा शायद जानते हैं, पिछले वर्ष भारत सरकार ने कोयला खान कल्याण उपकर के नाम से कोयले पर उपकर लगाया था जो तैयार कोयले पर 4 आना प्रति टन के हिसाब से वसूल किया जाता है। इसी कारण इस कोयला कोष के प्रशासन के लिए कोयला
खान कल्याण अधिकारी नियुक्त किया गया है। कोयला खान कल्याण कोष का संचालन एक समिति द्वारा होता है। समिति ने मालिकों और कोयला खदान श्रमिकों के बराबर-बराबर प्रतिनिधि और बिहार तथा बंगाल प्रांतों के प्रतिनिधि रखे गए है। और इसके अध्यक्ष श्रम विभाग के सचिव हैं। समिति कुल मिलाकर एक स्वायत्तशासी निकाय है। इसका अपना बजट है जो कोयला आयुक्त द्वारा तैयार किया जाता है। यह समिति के सामने पेश किया जाता है और कोयला खान कल्याण सचिव खर्च के लिए अधिशासी अधिकारी हैं। मलेरिया, जल आपूर्ति, चिकित्सा और कोयला कल्याण संबंधी सभी प्रश्नों पर समिति विचार करती है।
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्राः क्या आप किसी प्रकार का नियंत्रण रखते हैं?
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 3, 27 मार्च, 1945, पृष्ठ 2138-41