240 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः जी हां, मैं नियंत्रण रखता हूं क्योंकि श्रम विभाग का सचिव इसका अध्यक्ष है। बजट विचार के लिए हमारे पास आता है। जब वह पारित हो जाता है तो और संशोधन के लिए समिति के पास भेज दिया जाता है।
श्रम आयुक्त के बारे में मैं समझता हूं कि मेरे मित्र प्रोफेसर रंगा को पता होगा कि सभा प्रांतीय सरकारों में श्रम आयुक्त हैं। उनके अधीन उनके अपने समझौता अधिकारी और श्रमिकों के मामलों को देखने वाले अधिकारी हैं। भारत सरकार में यह अनुभव किया गया कि चूंकि उसके अधिकार में भी कुछ उपक्रम हैं इसलिए यह वांछित होगा कि भारत सरकार के भी वैसे ही और संगठन हों जो इन केंद्रीय उपक्रमों में लगे कर्मचारियों के कल्याण कार्यों को देखें। परिणामस्वरूप, हमने अभी यह संगठन स्थापित किया है। इस संगठन का प्रधान भारत का मुख्य श्रम आयुक्त है। शेष भारत को तीन भागों में बांटा गया है और प्रत्येक क्षेत्र का एक उप श्रम आयुक्त होगा। मैं समझता हूं कि प्रोफेसर रंगा जानना चाहेंगे कि हमने इस नए संगठन का लाभ उठाते हुए समझौता अधिकारी (रेलवे) तथा रेलवे श्रम सुपरवाइजर सहित केंद्रीय उपक्रमों के कार्य को समेकित कर दिया है। जो श्रम कल्याण अधिकारी विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग कार्य कर रहे थे और सीधे भारत सरकार के अधीन थे वे अब इन भिन्न-भिन्न श्रम आयुक्तों के अधीन होंगे। इसी प्रकार जो रेलवे निरीक्षक रेलवे समझौता अधिकारी के अंतर्गत अलग से काम कर रहे हैं और वेतन भुगतान अधिनियम तथा काम के घंटों का नियंत्रण करते हैं उन्हें भी नए कार्यक्रम के अधीन लाया जा रहा है और हमने एक एकीकृत कार्यक्रम तैयार कर लिया है।
जहां तक श्रम जांच समिति का संबंध है, मैं समझता हूं कि यह ध्यान रखा जाएगा कि गत वर्ष, बल्कि 1943 में, त्रिपक्षीय श्रम सम्मेलन में एक प्रस्ताव पास किया गया था कि भारत सरकार बेबरिज रिपोर्ट के अनुसार सामाजिक सुरक्षा उपाय अपनाए। तब यह अनुभव किया गया कि ऐसा कार्यक्रम बनाने से पूर्व एक तथ्य अन्वेषण समिति बनाई जाए जो सभी प्रश्नों पर विचार करें जैसे आवास, वेतन, स्वच्छता स्थिति, और श्रम कल्याण से संबद्ध अन्य कार्यों को देखे और जब तथ्यों का पता लग जाए तो भारत सरकार इस अनुसंधान समिति के सुझावों के अनुसार ऐसे सामाजिक सुरक्षा उपाय तैयार करेगी। यह समिति लगभग सात महीने से काम कर रही है और इसकी रिपोर्ट जून या जुलाई में मिल जाने की आशा है। जब रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी तो जांच के दूसरे भाग का कार्य शुरू किया जाएगा और वे तथ्य त्रिपक्षीय सम्मेलन के सामने रखे जाएंगे। दूसरी समिति में भी पहली समिति की तरह मालिकों, कर्मचारियों और प्रांतीय सरकार के प्रतिनिधियों को रखा जाएगा।