42. श्रम विभाग : अनुपूरक मांग के संबंध में - Page 266

श्रम विभाग - अनुपूरक मांग के संबंध में

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अकुशल श्रम आपूर्ति के संबंध में स्थिति यह है। पता चला है कि विभिन्न ठेकेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा है और अपने लिए अधिक मजदूर जुटाने के लिए वे निर्धारित दरों से अधिक मजदूरी ले लेते हैं और दूसरे ठेकेदारों के लिए संकट उत्पन्न कर देते हैं। परिणाम यह है कि जहां एक जगह फालतू मजदूर रख लिए जाते हैं वहीं अन्य क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी पड़ जाती है जिससे सैनिक कार्यों के लिए मजदूरों की बहुत कमी हो गई है। इसलिए भारत सरकार ने फैसला किया है कि श्रम शक्ति बनाए रखने की आवश्यकता है और इसके लिए पहला कदम यह उठाया गया है कि एक अकुशल मजदूर आपूर्ति समिति बनाई गई है। इसके अनुसार जो ठेकेदार एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र मेंं मजदूरों को ले जाना चाहते है वहां वे काम नहीं करते हैं तो उन्हें उस समिति को आवेदन देना होगा और आपूर्ति समिति द्वारा प्रमाणपत्र दिए जाने पर ही वह अन्य क्षेत्रों में मजदूर ले जा सकते हैं। ऐसे कई श्रमिकों की भर्ती के लिए कई केंद्र स्थापित किए गए हैं। इस योजना को चलाने वाला एक ठेकेदार होता है। मैं इस योजना का पूर्ण विवरण इस समय नहीं दे सकता परंतु यदि मेरे मित्र चाहें तो वे अल्प सूचना प्रश्न डाल सकते हैं जो मैं स्वीकार करने को तैयार हूं और इस विषय पर सूचना दूंगा।

श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायण (मदुरा और रामनाद-तिन्नेवलिः गैर मुस्लिम ग्रामीण) श्रीमन्, मैं अपने माननीय मित्र को धन्यवाद देती हूं जिन्होंने एक लंबा बयान देकर प्रो. रंगा और उनके सार्थियों को सूचना दी। परंतु मैं समझती हूं कि उन्होंने एक आवश्यक प्रश्न पर सूचना नहीं दी कि कोयला आयुक्त महिलाओं के भूमि के नीचे कार्य करने पर दुबारा प्रतिबंध लगाने पर विचार करेगा या नहीं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मेरा विश्वास है कि यह उसका कार्य नहीं है।

श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायणः मैं जानना चाहती हूं कि क्या कोयला आयुक्त अथवा समिति इस बात पर विचार करेगी या नहीं कि इस समय खदानों में जो श्रम स्थिति है वहां महिलाओं को अभी और भूमिगत काम करने की इजाजत रहेगी? क्या स्त्रियों के स्वास्थ्य के लिए ऐसी खानों में काम करना घातक नहीं हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः यह मामला उनके अंतर्गत नहीं आता।

श्री अब्दुल कयूमः फिर उनकी क्या आवश्यकता है?

श्री एन. एम. जोशीः (मनोनीत गैर-सरकारी)ः जैसा मैं समझता हूं, जो समिति नियुक्त की गई है उसका काम तथ्यों का पता लगाना है और निश्चित रूप से यह समिति इस प्रश्न पर भी तथ्यों का पता लगाएगी कि महिलाओं को खान के नीचे काम करने दिया जाए या नहीं और हर प्रश्न पर .....