43. खदान प्रसूति लाभ (संशोधन) विधेयक - Page 268

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ऽखदान प्रसूति लाभ (संशोधन) विधेयक

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः (श्रम सदस्य)ः उपाध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूंः

‘‘कि खदान प्रसूति लाभ अधिनियम, 1941 में और संशोधन करने वाले

विधेयक को एक प्रवर समिति को सौंप दिया जाए जो श्री एम. अनंत शयनम

आयंगर, प्रोफेसर एन. जी. रंगा, श्री के. बी. जिनराजा हेगड़े, मौलाना जफर अली

खां, सर सैयद रजा अली, श्री अमरेन्द्र नाथ चट्टोपाध्याय, श्री एन.एम. जोशी,

राव बहादुर एन. शिवराज, श्री एच. जी. स्टोक्स, श्री एस.सी.जोशी और प्रस्तावक

द्वारा गठित हो तथा जिसे निर्देश हो कि वह अपना प्रतिवेदन सोमवार 2 अप्रैल,

1945 तक दे और बैठक के लिए सदस्यों की न्यूनतम संख्या पांच होगी।’’

श्री बद्रीदत्त पांझे (रुहेलखेड और कुमाऊं मंडलः गैर मुस्लिम देहात)ः इसमें कोई महिला सदस्य क्यों नहीं हैं?

श्री टी. एस. अविनाशलिंगम चेट्टियार (सेलम और कोयम्बटूर व उत्तरी अर्काट ः गैर-मुस्लिम देहात)ः मैं श्रीमती सुब्बारायण के नाम का सुझाव देता हूंं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मेरे माननीय मित्र बाद में संशोधन रख सकते हैं, मैं उसे देख लूंगा।

जैसाकि सदन अवगत है, खदान प्रसूति लाभ अधिनियम, जो 1941 में पारित किया गया था, पहले से ही मौजूद है। इस विधेयक का उद्देश्य उस अधिनियम में संशोधन करना है। इस संशोधन को लाना क्यों आवश्यक है, यह मैं संक्षेप में बताता हूं।

जब 1941 का अधिनियम पारित किया गया था, जो इसका उद्देश्य धरातल पर काम करने वाली महिलाओं को लाभ पहुंचाना था। जैसा मैं कई बार सदन को बता

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 3, 29 मार्च, 1945, पृष्ठ 2265-66