43. खदान प्रसूति लाभ (संशोधन) विधेयक - Page 269

244 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

चुका हूं, दुर्भाग्य से हमें कोयला खदानों में महिलाओं को भूमि के नीचे काम करने की अनुमति देनी पड़ी। मैं कह चुका हूं कि यह व्यवस्था अस्थायी है और मुझे आशा तथा विश्वास है कि सरकार इस पर फिर जल्दी ही प्रतिबंध लगा देगी। परंतु इसके बावजूद कि प्रतिबंध अस्थायी रूप से ही हटाया गया है, हमने यह अनुभव किया कि इस सदन में तथा बाहर हुई आलोचनाओं के मुद्देनजर यह आवश्यक है कि अधिनियम में संशोधन किया जाए ताकि भूमि के नीचे काम करने वाली गर्भवती स्त्रियों का मामला अनुकूल बन सके। धरातल के नीचे काम करने वाली महिलाओं को प्रसूति लाभ मिले, यही इस विधेयक का उद्देश्य है।

इस विधेयक में मुख्यतः दो व्यवस्थाएं हैं अधिनियम में पहले से ही प्रावधान है कि प्रसव के बाद महिलाएं चार सप्ताह तक काम पर न जाएं। अब हमारा प्रस्ताव है कि सतह के नीचे काम करने वाली महिलाओं को प्रसवपूर्व भी काम पर न लगाया जाए। यह अवधि दस सप्ताह की होगी जिससे कि वर्तमान विधेयक के अनुसार महिलाएं प्रसव से दस सप्ताह पहले से धरातल के नीचे काम नहीं कर सकतीं। इसी प्रकार उसे आर्थिक लाभ पहुंचाने का प्रावधान भी है। यह लाभ उन्हें प्रसवपूर्व और इसके पश्चात की अवधियां मिलाकर 14 सप्ताहों तक बारह आना प्रतिदिन मिलेगा अर्थात दस सप्ताह प्रसव से पूर्व और चार सप्ताह प्रसव के उपरांत। यह लाभ प्राप्त करने की शर्त है कि 6 महीने की अवधि में उसने 90 दिन धरातल के नीचे कार्य किया हो। विधेयक के ये मुख्य प्रावधान हैं।

श्रीमन्, मुझे लगता है कि कुछ संशोधन ऐसे है जो पटल पर रखे गए हैं और मैं सदन को बताना चाहता हूं कि मैंने कुछ संशोधन के विषय में विचार किया। उनमें से कुछ को तो मैं सरकार की ओर से रखना चाहता था, परंतु क्योंकि समय बहुत कम है और मामला अविलंबनीय महत्व का है, इसलिए मैं समझता हूं इसे प्रवर समिति में रखा गया तो सभी संबद्ध व्यक्तियों के हितों को पूरा किया जाएगा। इस तरह जो संशोधन मेरे मन में है और पटल पर रखे गए हैं उन पर आमने-सामने बैठकर विचार कर लिया जाएगा। इसी कारण मेरा सुझाव है कि इसे प्रवर समिति को सौंप दिया जाए (जो मूल रूप से मेरा विचार नहीं था) मैं इस विधेयक पर अधिक नहीं बोलना चाहता। इसके साथ ही मैं यह प्रस्ताव प्रस्तुत करता हूं।

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ऽमाननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, मेरा यह विचार नहीं है कि जो बहस में माननीय सदस्यों ने कहा है कि उसके जबाव में उस पर और अधिक कुछ

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 3, 29 मार्च, 1945, पृष्ठ 2270