खदान प्रसूति लाभ (संशोधन) विधेयक
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कहूं। लेकिन एक बात जो मैं कहना चाहता हूं वह है कि मैं वक्ताओं की भावनाओं को समझता हूं जिनमें दो प्रश्न उठाए गए हैं। वे हैं स्त्रियों को धरातल के नीचे काम पर लगाने का और विधेयक पर उठे प्रश्नों को अलग-अलग लिए जाने का और मुझे यह कहने में प्रसन्नता है कि वक्ताओं ने उन्हें अलग-अलग ही उठाया है। उन्होंने विचार प्रकट किया और स्त्रियों को धरातल के नीचे काम पर लगाए जाने के गुणावगुणों पर प्रकाश डाला। सरकार का विचार पहले ही बनाया जा चुका है और मुझे उन विचारों पर कोई विवाद नहीं उठाना है जो सरकार के विरुद्ध व्यक्त किए गए। मुझे यह कहने में प्रसन्नता है कि सभी वक्ताओं ने इस विधेयक को आवश्यक समझा है और मुझे आशा है कि मुझे वैसा ही सहयोग मिलता रहेगा जैसा सदस्यों ने इस समय दिया है।
उपाध्यक्ष महोदय (श्री अखिल चंद्र दत्त) प्रश्न हैः
‘‘कि खदान प्रसूति लाभ अधिनियम, 1941 में और संशोधन करने वाले
विधेयक को एक प्रवर समिति को सौंप दिया जाए जो श्री एम. अनंत शयनम
आयंगर, प्रोफेसर एन.जी. रंगा, श्री के. बी. जिनराजा हेगड़े, मौलाना जफर
अली खां, सर सैयद रजा अली, श्री अमरेन्द्र नाथ चट्टोपाध्याय, श्री एन.एम.
जोशी, राव बहादुर एन. शिवराज, श्री एच. जी. स्टोक्स, श्री एस.सी.जोशी
और प्रस्तावक द्वारा गठित हो तथा जिसे निर्देश हो कि वह अपना प्रतिवेदन
सोमवार 2 अप्रैल, 1945 तक दे और बैठक के लिए सदस्यों की न्यूनतम
संख्या पांच होगी।’’
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।