44. कारखाना (दूसरा संशोधन) विधेयक - Page 271

246 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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ऽकारखाना (दूसरा संशोधन) विधेयक

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः (श्रम सदस्य)ः श्रीमन्, मैं प्रस्ताव करता हूंः

‘‘कि करखाना अधिनिमय, 1934 में और संशोधन करने वाले विधेयक पर, प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित रूप में, विचार किया जाए।’’

श्रीमन्, प्रवर समिति का प्रतिवेदन काफी समय से सदन के समक्ष है। मुझे संदेह नहीं कि इस विषय में रुचि रखने वाले सदस्यों ने प्रवर समिति के प्रतिवेदन को पढ़ लिया है और इसे हृदयंगम कर लिया है। मैं प्रस्तुत विधेयक पर प्रवर समिति द्वारा किए गए कतिपय आधारभूत परिवर्तनों की ओर सदन का ध्यान आकृष्ट करने के अतिरिक्त कुछ नहीं करूंगा। प्रवर समिति ने कुल मिलाकर पांच महत्वपूर्ण और मूलभूत परिवर्तन किए हैं। पहला परिवर्तन जो प्रवर समिति ने किया है वह कर्मचारी को मिलने वाले संवैतनिक अवकाश के अधिकार की रक्षा करना है, जो अधिनियम में विद्यमान नहीं है। वह छुट्टियां जिन्हें प्रत्यावर्तन में मान्यता प्राप्त है या सेवा संविदा समझौते में वर्णित हैं उनके बारे में प्रावधान मूल विधेयक में नहीं था। परंतु अब धारा 49 ’क’ की उपधारा (2) के जरिए इसकी व्यवस्था कर दी गई है। दूसरा परिवर्तन जो प्रवर समिति द्वारा किया गया है वह बच्चों के लिए भी सवैतनिक अवकाश की व्यवस्था है जो सदन में प्रस्तुत मूल विधेयक में नहीं थी। प्रवर समिति ने न केवल अवकाश लाभ बाल श्रमिकों को भी उपलब्ध कराया है बल्कि उनकी छुट्टी के दिनों की संख्या भी बढ़ा दी है। वयस्क को सात दिन की छुट्टियां मिलेंगी किंतु बालकों को 14 दिन का अवकाश मिलेगा। माननीय सदस्य यह प्रावधान धारा 49 ‘ख’ में देख सकेंगे, फिर, सदन को याद होगा कि जब विधेयक प्रस्तुत किया गया था तो ऐसे कर्मचारियों के मामलों में कोई व्यवस्था नहीं थी जिनका अवकाश अर्जित नहीं हुआ हो अथवा जिन्होंने त्यागपत्र दे दिया हो और वे कार्यमुक्त कर दिए गए हों इसलिए वे अवकाश के पात्र नहीं रहते। मैंने कहा था कि इस पर कालांतर में

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 3, 29 मार्च, 1945, पृष्ठ 2270-71