44. कारखाना (दूसरा संशोधन) विधेयक - Page 275

250 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्रो. एन. जी. रंगाः (गुंटूर और नैल्लौरः गैर-मुस्लिम ग्रामीण)ः हम दूसरा संशोधन छोड़ने को तैयार हैं।

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः प्रश्न हैः

‘‘कि विधेयक के खंड तीन में प्रस्तावित धारा 49ख की धारा 34 धारा (1) और (2) में, ‘‘सात’’ के स्थान पर ‘‘दस’’ कर दिया जाए।’’

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः इस संबंध में एक आनुषंगिक संशोधन होना है कि उपखंड (2) में ‘‘सात’’ के स्थान पर ‘‘दस’’ हो जाएगा।

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः मैं समझता हूं कि इस बारे में माननीय सदस्य कोई उपयुक्त संशोधन रखें। यह बाद में भी हो सकता है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः उपधारा (2) में, प्रथम पंक्ति में ‘‘सात’’ के स्थान पर ‘‘दस’’ प्रतिस्थापित किया जाएगा।

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः इस बारे में एक औपचारिक संशोधन लाया जाना चाहिए।

* * *

ऽमाननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः श्रीमन्, मुझे खेद है कि मैं इस संशोधन को स्वीकार नहीं कर सकता। मेरे माननीय मित्र श्री इसंकिप ने कहा है कि बीमारी की कोई परिभाषा नहीं है। अच्छज्ञ होता है कि हम बीमारी की परिभाषा कर सकते। मैंने स्वास्थ्य बीमा अधिनियम में तलाश किया, और मुझे पता चला कि बीमारी की कोई परिभाषा नहीं है इसका सीधा सा कारण यह है कि बीमारी को परिभाषित नहीं किया जा सकता। यह प्रमाणीकरण का मामला है। यदि कोई चिकित्सक कहता है कि फलां व्यक्ति बीमार है तो सभी को यह परिभाषा माननी होगी। यदि मेरे माननीय मित्र का कहना यह है कि प्रमाणपत्र का कोई तरीका होना चाहिए तो मैं उनकी शिकायत को समझ सकता हूं। परंतु इस संबंध में मेरा निवेदन है कि उनकी शिकायत का कोई आधार नहीं है क्योंकि हमारा विचार ऐसे नियम बनाने का है जिनके अनुसार यह निर्धारित किया जाएगा कि कौन व्यक्ति प्रमाणपत्र देने के अधिकारी होंगे, उनकी योग्यता निर्धारित की जाएगी। मुझे आशा है कि परिणामस्वरूप ऐसी कोई आशंका नहीं रहेगी कि ऐसे चिकित्सक लाभ उठा पाएंगे जो आमतौर पर लोगों का इलाज

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 4, 2 अप्रैल, 1945, पृष्ठ 2318