कारखाना (दूसरा संशोधन) विधेयक
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नहीं करते, मात्र झूठे प्रमाणपत्र देते हैं। मुझे आशा है कि ऐसे नियम बनाए जाएंगे कि यह संकट दूर हो जाएगा। इस संशोधन को स्वीकार करने में मुझे कठिनाई इसलिए है कि मेरे माननीय मित्र का कहना है कि बीमारी के बारे में केवल प्रमाण-पत्र ही पर्याप्त नहीं होना चाहिए बल्कि मालिकों को यह छूट दी जाए कि वे फैसला दबा कर बैठे रहें, चाहे प्रमाण-पत्र दे भी दिया गया हो, प्रमाण-पत्र के बावजूद, वह चाहे तो छुट्टी स्वीकार करे या न करे। मैं कहूंगा कि यह ऐसी स्थिति है जिसमें सरकार भागीदार नहीं बन सकती। सरकार मालिक को यह छूट नहीं दे सकती कि वह कह दे कि नियमों में डॉक्टरों की जो योग्यताएं निर्धारित की गई हैं उसके प्रमाणपत्र को मानना या न मानना मालिक पर निर्भर है, और इसी कारण में इस संशोधन को मानने के लिए तैयार नहीं हूं।
मेरे माननीय मित्र ने एक और बात कहीं है कि हमने उनकी सभी तीन आकस्मिकताओं अर्थात बीमारी, दुर्घटना और अधिकृत छुट्टी के बारे में नब्बे दिन की सीमा निर्धारित कर दी है। परिणामतः कर्मचारी का बीमारी का बहाना अनिश्चित काल तक नहीं चल सकता क्योंकि तीनों आकस्मिकताओं के लिए हमने नब्बे दिन की सीमा बांध दी है और यदि नब्बे दिन की सीमा बीत जाती है, तब कानूनी लाभ की पात्रता समाप्त हो जाएगी। इन परिस्थितियों के मद्देनजर, मैं संशोधन का विरोधा करूंगा।
अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः प्रश्न हैः
‘‘कि विधेयक के खंड 3 में प्रस्तावित धारा 49 (ख) के अंत में स्पष्टीकरण में शब्द ‘बीमारी, दुर्घटना अथवा अधिकृत छुट्टी’ के स्थान पर ‘बीमारी, दुर्घटना अथवा सहानुभूतिक कारणों से स्वीकृत छुट्टी’ प्रतिस्थापित किए जाएं।’’
संशोधन अस्वीकृत हुआ।