45. खदान प्रसूति लाभ (संशोधन) विधेयक - Page 277

252 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

45

ऽखदान प्रसूति लाभ (संशोधन) विधेयक

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः श्रीमन्, मैं प्रस्ताव करता हूंः

‘‘कि खदान प्रसूति लाभ अधिनियम, 1941 में और संशोधन करने वाले विधेयक पर, प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित रूप में, विचार किया जाए।’’

श्रीमन्, मैं मानता हूं कि विधेयक प्रवर समिति ने उल्लेखनीय संशोधन किए हैं। इसके संदर्भ में यह उचित होगा कि विधेयक में किए गए कुछ परिवर्तनों की ओर मैं सदन का ध्यान दिलाऊं जो प्रवर समिति ने किए हैं।

(इस अवसर पर अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर्रहीम) फिर पीठासीन हुए)

प्रवर समिति ने जो पहला परिवर्तन किया है कि वह गर्भवती स्त्री को धरातल के नीचे कार्यों पर भेजे जाने की अवधि संबंधी प्रतिबंध है। मूल विधेयक में प्रसूति से 10 सप्ताह पूर्व और प्रसूति के चार सप्ताह बाद तक प्रतिबंध था। प्रवर समिति ने मूल से प्रसूति पूर्व की प्रस्तावित अवधि में परिवर्तन नहीं किया है परंतु प्रसूति उपरांत की अवधि में जो परिवर्तन किए गए हैं कि वे व्यापक हैं। यह प्रतिबंध अवधि चार सप्ताह से बढ़ाकर छत्तीस सप्ताह कर दी है।। छत्तीस सप्ताह की अवधि के दो चरण हैं। पहला है, पूर्ण प्रतिबंध और दूसरा चरण है आंशिक प्रतिबंध। पूर्ण प्रतिबंध की अवधि प्रवर समिति ने बढ़ाकर छब्बीस सप्ताह कर दी है। आंशिक प्रतिबंध की अवधि दस सप्ताह है। आंशिक अवधि के भी दो भाग हैं जो शिशु गृह की सुविधा और सुविधाहीनता पर आधारित हैं। यदि शिशु गृह की व्यवस्था नहीं है, तो स्त्री चार घंटे से अधिक धरातल के नीचे कार्य नहीं कर सकती और दूसरा, यदि शिशु गृह है भी और किसी समय उसकी सुविधा न हो तो भी स्त्री चार घंटे से अधिक काम नहीं कर सकती। प्रवर समिति ने धरातल के नीचे कार्य पर प्रतिबंध के संदर्भ में ये परिवर्तन किए हैं।

धरातल के नीचे कार्य करने वाली स्त्रियों को प्रसूति लाभ के प्रश्न पर प्रवर समिति ने निम्नलिखित परिवर्तन किए हैंः मूल विधेयक में धरातल के नीचे कार्य

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 4, 11 अप्रैल, 1945, पृष्ठ 2788-89