खदान प्रसूति लाभ (संशोधन) विधेयक
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करने वाली स्त्रियों की प्रसूति लाभ की पात्रता की दो शर्ते रखी गई थी। ये शर्ते थींः प्रसूति से न्यूनतम छः महीने पहले खदान में कार्यरत होना और इन छः महीनों में 90 दिन तक धरातल के नीचे कार्य। प्रवर समिति ने पहली शर्त हटा दी है, अर्थात खदान में न्यूनतम छः मास की सेवा, ताकि संशोधित विधेयक में बस इतना ही पर्याप्त माना जाए कि स्त्री ने प्रसूति से पूर्व के छह महीनों में नब्बे दिन तक तल के नीचे कार्य किया है। उस स्थिति में वह प्रसूति लाभ की पात्र होगी।
प्रवर समिति ने लाभ की अवधि के बारे में भी संशोधन किए हैं। मूल विधेयक में प्रसूति लाभ की अवधि प्रसूति से दस सप्ताह पूर्व और प्रसूति उपरांत चार थी। प्रवर समिति ने प्रसूति उपरांत लाभ प्राप्त करने की अवधि चार से बढ़ाकर छह सप्ताह कर दी है। साथ ही लाभ राशि में भी परिवर्तन कर दिया गया है। मूल रूप से, लाभ राशि आठ आना प्रतिदिन थी। प्रवर समिति ने इसे बढ़ाकर छः रुपए प्रति सप्ताह कर दिया है जो चौदह आना प्रतिदिन से कुछ ही कम है। फिर, पूरी अवधि को अधिकृत छुट्टी घोषित कर दिया गया है ताकि इस काल के दौरान कोई मालिक इस विधेयक के अधीन आने वाली स्त्री को निकाल न सके।
प्रवर समिति ने जो अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान किया है वह है लाभ की पात्र स्त्री की मांग पर उसकी डाक्टरी जांच महिला डाक्टर से कराई जाएगी। यह प्रावधान मूल विधेयक में नहीं था। मैं सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि छत्तीस प्रतिबंध्तिसप्ताहों के बीच कोई स्त्री बत्तीस सप्ताहों के दौरान धरातल के नीचे कार्य को छोड़कर अपनी आमदनी के लिए अन्य कार्य कर सकती है। यह व्यवस्था मूल विधेयक में नहीं थी। जिस अवधि में उसे काम नहीं दिया जा सकता, वह प्रसूति के बाद मात्र चार सप्ताह है। इस तरह संशोधन के अधीन कोई स्त्री, स्त्री को प्राप्त होने वाले प्रसूति लाभ की ही पात्र नहीं है अपितु वह भूमि पर काम करने पर भी मूल अधिनियम में प्राप्त पूर्व लाभ का पचास प्रतिशत भी प्राप्त करेगी।
ये कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन हैं जो प्रवर समित ने किए हैं। जैसा कि मैंने कहा है, प्रवर समिति के महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर कुल मिलाकर सरकार संशोधनों में कोई कठिनाई उत्पन्न नहीं करना चाहती और इस विषय में विशेष परिस्थितियों को देखते हुए वह प्रवर समिति के संशोधनों के अनुरूप विधेयक स्वीकार करने को तैयार है।
मान्यवर मैं प्रस्ताव प्रस्तुत करता हूं।
अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर्रहीम) प्रस्ताव प्रस्तुत हुआः
‘‘कि खदान प्रसूति लाभ अधिनियम, 1941 में और संशोधन करने वाले विधेयक पर, प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित रूप में, विचार किया जाए।’’