47. राष्ट्रीय सेवा श्रम न्यायाधिकरण का युद्ध कार्य - Page 281

256 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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ऽराष्ट्रीय सेवा श्रम न्यायाधिकरण का युद्ध कार्य

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की श्रद्धांजलि

‘‘जिस समय विश्व युद्ध चल रहा था और जब भारत पर आक्रमण का खतरा मंडरा रहा था उस समय हमारी सेनाओं तथा युद्ध उद्योगों के लिए तकनीकी कार्मिकों की तुरंत आवश्यकता की पूर्ति के मामले में गंभीर अवरोध थे। तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय सेवा श्रम न्यायाधिकरण बनाया गया। तकनीकी कार्मिकों को शीघ्रता से कार्यकुशल बनाना था और इसलिए, हमारी अनुभवहीनता के कारण, स्वाभाविक रूप से हमारी योजना कमजोर रही। इस कार्य में कठिनाइयां थीं, परंतु इसका कार्य सम्पादन आपके प्रशंसनीय प्रयासों का द्योतक है।’’

श्रम सदस्य, भारत सरकार, माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने राष्ट्रीय सेवा न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों को संबोधित करते हुए ये विचार प्रकट किए जिनकी बैठक 19 अप्रैल को शिमला में राष्ट्रीय सेवा (तकनीकी कार्मिक) अध्यादेश और रोजगार कार्यालयों पर विचार करने के लिए आयोजित की गई थी।

श्रम सदस्य ने आगे कहाः

न्यायाधिकरणों ने करीब 15 हजार तकनीशियनों का राष्ट्रीय सेवाओं में प्रवेश कराया है। उन्होंने तकनीकी कार्मियों को कारगर रूप से पहुंचाने का काम भी किया। कर्मचारियों को अपने घरों से दूर भेजना भी आवश्यक था और उन्हें अन्यत्र बेहतर काम ढूंढने से रोकना भी आवश्यक था। इंग्लैंड में ऐसा कार्य अपेक्षाकृत सरल है क्योंकि वहां रोजगार की अवस्था कुल मिलाकर मानकीकृत है और श्रम मंत्रालय तथा राष्ट्रीय सेवा के व्यापक संगठन हैं जो अनिवार्य लामबंदी में विशेष रूप से उनके हितों का ध्यान रखते हैं जिन्हें घरों से दूर भेजा जाता है। भारत में न्यायाधिकरणों की परिस्थिति भिन्न है और आमतौर से यह कहा जा सकता है कि उन्होंने युद्ध प्रयासों को दृढ़ करने के अपने कार्य को, कर्मचारियों के हितों की अनुचित रूप से अनदेखी किए बिना, प्रशंसनीय होशियारी और संयम से निभाया है।

ऽ इंडिया इन्फार्मेशन, 15 मई, 1945, पृष्ठ 39-40