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राष्ट्रीय सेवा श्रम न्यायाधिकरण का युद्ध कार्य

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कुछ ऐसे मालिक हैं जिन्होंने शिकायत की है कि न्यायाधिकरण ने अनुचित रूप से कर्मचारियों के प्रति उदारता बरती है। दूसरी ओर, यह भी शिकायतें हैं कि उसने श्रमिकों के प्रति अनुचित कड़ाई बरती है। मैंने कर्मचारियों अथवा मालिकों की शिकायतों को दरकिनार नहीं किया है। मेरा सदा यह विश्वास रहा है कि शिकायतों पर सावधानी से विचार करने से सरकार सहीं उपाय कर सकती है। आप देखेंगे कि एक ओर तो हमने सुझाव दिया कि कर्मचारियों के बहिर्गमन पर नियंत्रण कठोर किए जाएं जिसके बारे में हमें कलकत्ता से गंभीर शिकायतें मिली हैं। दूसरी ओर हमें न्यायाधिकरणों से अपेक्षा है कि वे उन कर्मचारियों की रोजगार अवस्थाओं पर भली भांति ध्यान दें जिन्हें राष्ट्रीय सेवा के लिए निर्दिष्ट किया गया है या जिनके बेहतर रोजगार अवसरों पर रोक लगा दी गई है।

न्यायसंगत नियंत्रण

मैं उस ब्यौरे में नहीं जाना चाहता जो आगमी बैठक में सुझावों में सामने आएंगे, किंतु मैं आपको इस तथ्य से अवगत कराना चाहता हूं कि युद्ध से कर्मचारियों पर भारी दबाव पड़ा है और यदि युद्ध के कारण उनसे और त्याग करने को कहा गया तो हम आश्वासन देते हैं कि वह एकतरफा नहीं होगा। मालिकों की ओर से कितना भी दबाव डाला जाए, युद्ध का संकट श्रमिकों की दुर्दशा नहीं कर सकता अथवा श्रमिकों का महत्व कम नहीं कर सकता।

ब्रिटेन में श्रम और राष्ट्रीय सेवा मंत्री के पास व्यापक अधिकार है। ये अधिकार ऐसे हैं कि उनका उपयोग दोनों पक्षों पर समान रूप से किया जाता है, अर्थात मालिकों के विरुद्ध और उतना ही श्रमिकों के विरुद्ध। इन अधिकारों से मालिक और श्रमिक समान स्तर पर आ गए हैं ताकि दोनों के बीच समन्वय रहे। यही सहयोग भावना है जिसे मैं भारत में जागृत करना चाहता हूं और मुझे विश्वास है कि यदि हम इस नियंत्रण को कड़ाई से और न्यायपूर्वक लागू करें तो यह संभव है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और श्रम न्यायाधिकरणों का एक अन्य पक्ष भी है जिस पर विचार किया जाना चाहिए। भारत और इंग्लैंउ में प्रशिक्षण योजनाओं का कार्य इन्हीं को सौंपा गया है और मैं उस सावधानी की हार्दिक प्रशंसा करना चाहता हूं जो उन्होंने इस कार्य में बरती है। इसके अभाव में हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम सफल नहीं हो सकते थे।

बेविन प्रशिक्षण कार्यक्रम के विषय में मैं जानता हूं कि श्रम और राष्ट्रीय सेवा मंत्रालय प्रशिक्षुओं के उत्कृष्ट चयन से प्रभावित है जिन्हें ब्रिटेन भेजा गया। निस्संदेह बेविन प्रशिक्षुओं में कुछ संदिग्ध लोग भी थे। परंतु उनकी संख्या को देखते हुए हम स्वयं को सफल मानते हैं कि वे इतने कम थे कि उनके विषय में यह नहीं कहा