258 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जा सकता कि इस कार्यक्रम पर जो धन और समय खर्च किया गया वह व्यर्थ गया। दूसरी ओर, बेविन प्रशिक्षितों में से अधिकांश लोग हमारे यहां कुशल कर्मचारियों का स्तर ऊंचा उठाने में बहुत सहायक होंगे। वे एक ऐसे देश से अनुभव लेकर लौटे हैं जो संपूर्णतः युद्ध में तल्लीन है। इस प्रकार संगठित देश क्या प्राप्त नहीं कर सकता? ये उपलब्धियां केवल युद्ध तक ही क्यों सीमित रहें? क्या हम इन्हें शांति के दौरान प्राप्त नहीं कर सकते? हमें आशा है जल्दी ही हम ऐसा कर पाएंगे।
पुनर्वास व्यवस्था
अब मैं युद्धोपरांत स्थिति पर आता हूं तो हमारे समक्ष युद्ध से भी बढ़कर जटिल मुद्दे उत्पन्न करेगी। पहली और सबसे महत्वपूर्ण समस्या होगी बेरोजगार हुए कार्मिकों का पुनर्वास। अब मेरे दिमाग में केवल लड़ाकू सैनिकों का ही प्रश्न नहीं है, बल्कि भारी संख्या में उन कामगारों का ध्यान है जो युद्ध सामग्री कारखानों में तैनात हैं। कोई सरकार बेरोजगार हो गए भूतपूर्व कर्मियों और युद्ध उद्योग के कर्मचारियों को युद्ध और शांति की संक्रांति में उनके हाल पर नहीं छोड़ सकती। पुनर्वास करना सरकार का प्रशासनिक कर्तव्य है और सरकार ने फैसला किया है कि यह दायित्व श्रम विभाग का होगा। हमारे पुनर्वास प्रस्तावों पर आपके साथ विचार-विमर्श होगा। जो व्यवस्थातंत्र स्थापित होने की आशा है उसमें राष्ट्रीय सेवा श्रम न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों को महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए बुलाया जाएगा।
पुनर्वास की समस्या ऐसी है जिसे केंद्र और प्रांत सरकारें मिल कर घनिष्ट सहयोग से हल करेंगी। प्रांतों के अध्यक्ष क्षेत्रीय प्रमुख होंगे। उसका दायित्व होगा केंद्र तथा प्रांत सरकारों के विभागों के साथ निकट संपर्क रखना। आपको अत्यधिक चतुराई, क्षमता और मेहनत से काम करना होगा। मैं आशा करता हूं कि आप अपने कर्तव्य का पालन करते समय युद्ध काल से कम सहयोग नहीं करेंगे।
सक्षम रोजगार सेवाएं
पुनर्वास संगठनों के विस्तार में जाने की आवश्यकता नहीं है। किन्तु मैं एक ऐसी सेवा के विषय पर बल दूंगा जो बेकाम हुए पूर्वकर्मियों के बारे में आवश्यक हैं। हम जो संगठन बनाना चाहते हैं उसका मुख्य उद्देश्य देश में एक सक्षम सेवा आरंभ करना है। हमने पहले ही कुछ कार्यालय खोल दिए हैं जिनके अच्छे परिणाम निकले हैं, परंतु यह स्पष्ट है कि हमें यह व्यवस्था ठोस आधार पर संगठित करनी चाहिए। ये दफतर चलाने के लिए हमें प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता है और उपयुक्त इमारतों की जरूरत है यहां कर्मचारी और मालिक आ सकें। दोनों मामलों में हमारे मौजूद रोजगार कार्यालयों के सामने काफी कठिनाइयां हैं। जहां तक स्टाफ का संबंध है, हम प्रबंधकों