260 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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ऽदामोदर घाटी का बहुउद्देशीय विकास
कलकत्ता सम्मेलन में श्रम सदस्य का भाषण
‘‘यह परियोजना (दामोदर नदी के जल का सदुपयोग) भारत सरकार के लिए स्वागत योग्य है। यह नदी के पानी के नियंत्रण की अच्छी संभावना प्रकट करती है। इससे बाढ़ नियंत्रण की संभावना है। योजना से काफी क्षेत्र में अनवरत सिंचाई हो सकेगी और इसका परिणाम होगा अकाल से मुक्ति और बिजली की वांछित आपूर्ति की संभावना। मुझे विश्वास है कि यदि उन्हें इस बात का अहसास हो जाए कि इस परियोजना का उनके और उनकी जनता के लिए क्या अर्थ है तो इसका बंगाल और बिहार की सरकारें और भी उत्साह से स्वागत करेंगी।’’
ये विचार भारत सरकार के श्रम सदस्य माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने 23 अगस्त को कलकत्ता में दामोदर घाटी बहुउद्देशीय परियोजना पर विचार करने हेतु हुए सम्मेलन में बंगाल और बिहार के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए प्रकट किए। सम्मेलन दो दिन चला जिसकी अध्यक्षता श्रम सदस्य ने की।
डॉ. अम्बेडकर के भाषण का पूरा पाठ इस प्रकार हैः
‘‘दामोदर घाटी के पानी के सदुपयोग की परियोजना पर विचार करने के लिए आज हम दूसरी बार मिल रहे है। आपको याद होगा कि इस संबंध में हमारी प्रथम बैठक 3 जनवरी, 1945 को हुई थी। तब हमने बंगाल सरकार द्वारा 1944 में गठित दामोदर नदी बाढ़ जांच समिति की रिपोर्ट पर विचार किया था।
हमारे सामने मुद्दा था कि क्या हम केवल नदी में बाढ़ रोकने के लिए बांध बना कर ही संतोष कर लें या हम इसे बहुउद्देशीय परियोजना बनाएं, जिसमें बिजली उत्पादन और सिंचाई तथा नौवहन के लिए जलापूर्ति शामिल हो? उस बैठक में आम सहमति थी कि हम दूसरे विकल्प का कार्य करें। तदनुसार, सम्मेलन में अगला कदम उठाने
ऽ इंडिया इन्फार्मेशन, 1 अक्तूबर, 1945, पृष्ठ 45-49