48. दामोदर घाटी का बहुउद्देशीय विकास - Page 287

262 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

‘‘यह परियोजना भारत सरकार के लिए स्वागत योग्य है। यह नदी के पानी के नियंत्रण की अच्छी संभावना प्रकट करती है, बाढ़ नियंत्रण की संभावना, काफी क्षेत्र में अनवरत सिंचाई और परिणामस्वरूप अकाल से मुक्ति तथा बिजली आपूर्ति की संभावना। मुझे विश्वास है कि यदि उन्हें इस बात पर अहसास हो कि इस परियोजना का उनके और उनकी जनता के लिए क्या अर्थ है तो बंगाल और बिहार की सरकारें इसका और भी उत्साह से स्वागत करेंगी।’’

ठोस शब्दों में कहा जाए तो इस परियोजना से (1) 4,700,000 एकड़ क्षेत्र में नियंत्रित जलाशय से जल मिलेगा (2) 760,000 एकड़ क्षेत्र की अनवरत सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा (3) 300,000 किलोवाट बिजली मिलेगी और (4) 50 लाख लोगों का प्रत्यक्ष रूप से तथा अन्य लाखों का अप्रत्यक्ष रूप से कल्याण-वर्द्धन होगा।

अब प्रक्रियागत बातों पर आते हैं जो निम्नलिखित बिंदुओं पर प्राथमिकतानुसार इस प्रकार हैः

(1) सबसे पहले बांध स्थल का चयन किया जाना।

(2) निर्माण आरंभ करने से पूर्व निश्चित किए गए स्थल की विस्तृत जांच-पड़ताल।

(3) ऐसी अगली पड़तालों के लिए एक अभिकरण।

(4) बांध के (डिजाइनिंग) और निर्माण के लिए अभिकरण।

(5) इस विशाल कार्य को चलाने के उद्देश्य से तालमेल के लिए एक तकनीकी और प्रशासनिक उच्च स्तरीय तंत्र का गठन होगा यह कार्य जांच पड़ताल के समय किया जाएगा और निर्माण के समय उस पर अमल होगा।

(6) विकसित क्षेत्र में संभावित रूप से प्राप्त होने वालो पानी और बिजली के विषय में सर्वेक्षणों का सिलसिला।

प्रक्रिया संबंधी मामलों के बारे में मैं शीघ्र निर्णय पर बल दूंगा। निस्संदेह यह परियोजना मूल रूप से उद्देशीय नदी घाटी योजना के संरक्षण और विकास के लिए है। परंतु यह नहीं भूलना चाहिए कि यह परियोजना युद्धोपरांत रोजगार परियोजना है। अब क्योंकि सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त हो गया है हमारे सामने शांतिकाल की समस्याएं हैं। उनमें से एक है युद्धकाल के सेवा अभियोजन और खर्च में अचानक भारी कमी जो हमारी आंतरिक अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर समस्या बनने वाली है।