दामोदर घाटी का बहुउद्देशीय विकास
केंद्र सरकार की भूमिका
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‘‘इस दृष्टिकोण से दामोदर घाटी परियोजना अत्यधिक तात्कालिक आवश्यकता वाली परियोजना है और इसके संबंध में जल्दी फैसला न करना अक्षम्य भूल होगी, क्योंकि इसके बिना हम इस विषय में आगे नहीं बढ़ सकते। इसलिए मुझे आशा और विश्वास है कि आपके सहयोग से आपका फैसला संपूर्ण और दृढ़ होगा।’’
समापन से पूर्व मैं आपकों बता दूं कि इस परियोजना को पूरा करने के लिए भारत सरकार पूरी तरह अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
(1) भारत सरकार अपनी पूर्व घोषणा के अनुसार स्वीकृति के आधार पर परियोजना में तीव्रता लाने के लिए जो कुछ कर सकती है वह करने का दायित्व स्वीकार करती है और इस प्रयास में अपनी पूर्व क्षमतानुसार कार्य करेगी। यद्यपि परियोजना चलाने के प्राधिकरण और उसकी स्थापना का तरीका अभी निश्चित किया जाना है, तथापि भारत सरकार का पहले की तरह दृढ़ विचार है कि ऐसे प्राधिकरण की स्थापना अपरिहार्य है।
(2) भारत सरकार निर्माण कार्य में दोनों सरकारों की सहायता से युद्धोपरांत विकास कार्यों में बाधा डाले बिना कर्मचारी उपलब्ध कराने और वांछित संगठन की सीधी जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार है। वैसे भारत सरकार को अहसास है कि बंगाल में इंजीनियरों का अभाव है और वह सेना से आवश्यक कर्मचारी ले सकती है। यदि किसी सैनिक एकक या उसके उपकरणों की आरंभिक पड़ताल के लिए आवश्यकता पड़ी तो वे लिए जा सकते हैं। प्रांत के इंजीनियरी स्रोतों पर दबाव से बचने के लिए शीघ्रता से उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
(3) उसकी ओर से आरंभिक पड़ताल पर शुरू में जो आवश्यक खर्च होगा केंद्र इस भरोसे पर उस धन को मुहैया कराने को तैयार है कि यदि परियोजना शुरू होती है तो इसका खर्च उठाया जाएगा_ यदि यह शुरू नहीं होती है तो केंद्र और प्रांत सरकारें आधा-आधा खर्च उठाएंगी।
परियोजना से केंद्र सरकार को एक अपेक्षा है। वह अपेक्षा करती है कि प्रांत को यह ध्यान रहे कि यह योजना नितांत आवश्यक है और अंततोगत्वा परियोजना का जो लाभ होगा वह निम्नतर स्तर के लोगों को भी मिलना चाहिए, अर्थात घाटी और निकटवर्ती क्षेत्रों के सभी निवासियों को उनका समृद्धि का भाग मिले जो परियोजना से आएगी। मेरा विचार यही है परियोजना के महत्व को देखते हुए, हम जल्दी ही कोई अभिकरण बनाना चाहते हैं ताकि वह तुरंत कोई आवश्यक योजना तैयार करे जिससे अंतिम लक्ष्य पूरा हो।