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268 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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श्रमिकों के प्रति सरकारी दायित्व

26 नवम्बर को नई दिल्ली में आयोजित सातवें श्रम सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए जो अब भारतीय श्रम सम्मेलन कहलाएगा, माननीय श्रम सदस्य, डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने श्रमिकों के लिए सरकार के दायित्व का लेखा-जोखा पेश किया और आग्रह किया कि भारतीय मजदूरों का स्तर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लाने के लिए कानून बनाया जाए।

रॉयल श्रमिक आयोग की सिफारिशों और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के कंवेशनों की स्वीकार्यता के बारे में सरकार द्वारा की गई कार्यवाही का लेखा-जोखा पेश करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि हमारे सामने केवल दस सिफारिशें ही शेष हैं जो विचाराधीन हैं और 63 कंवेशनों में से भारत को 19 की पुष्टि करनी है। परंतु श्रम सदस्य ने बताया कि ‘‘यह भारत की अनिच्छा के कारण नहीं हैं’’ अपितु इसका कारण ‘‘यह नियम है कि भारत उन्हें बिना परिवर्तन अथवा संशोधन के स्वीकार कर ले।’’ श्रम सदस्य ने कहा कि ‘‘यह संभव हो सकता है यदि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन एक ऐसा समझौता मसौदा तैयार करे जिसमें पुष्टि के चरणों की व्यवस्था की जाए।’’

उपस्थित जन का स्वागत करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहाः-

‘‘मैं समझता हूं हम प्रसन्न हैं कि शांति स्थापित हो गई है। हमें छह साल तक कठोर संघर्ष करना पड़ा जिसमें जन धन की अपार हानि हुई। इस बात का तो कुछ कहना ही नहीं कि हमें कितने कष्ट भोगने पड़े। यह हमारे लिए सकून की बात है कि अब हमारे सामने युद्ध की समस्या नहीं है, न युद्ध प्रयासों की, जिससे हमें सब कुछ न केवल तैयार रखना पड़ता था बल्कि अत्यंत अल्पावधि सूचना पर तैयार करना पड़ता था। भगवान का धन्यवाद है कि वह बात अब नहीं रही। परंतु आप सब जानते हैं कि हमें कष्ट देने के लिए अब युद्ध वाली स्थिति नहीं है, अब हमारे शांति काल की समस्याएं हैं जैसे कि लोगों के सामाजिक और आर्थिक जीवन का पुनर्निर्माण। इन समस्याओं से भारत विश्व के अन्य देशों से कम प्रभावित नहीं है।