272 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
‘‘मैंने आपको उन श्रम कानूनों का विवरण दे दिया है जो शेष हैं। मैंने यह भी बता दिया है हम इनसे क्यों नहीं बच सकते। इस प्रकार मुझे इस बात के लिए खेद प्रकट करने की आवश्यकता नहीं है कि प्रस्तुत कार्यसूची इतनी लंबी है। कार्यसूची में आठ मदें हैं। उनमें से कुछ बहुत महत्वपूर्ण हैं विशेष रूप से मद संख्या 2 जिसका संबंध काम के घंटे कम करने से है, मद संख्या 3 जो न्यूनतम वेतन कानून से संबद्ध है और मद संख्या 8 जो मजदूर संघों की मान्यता के बारे में है।
मंदी का सामना करने के उपाय
‘‘आप कल्पना कर सकते हैं कि विशेष बल देने के लिए मैंने इन्हीं मदों को क्यों चुना। शांति स्थापना सुखद है लेकिन इससे समस्याओं का पिटारा भी खुल जाएगा। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण होगी बेरोजगारी की भीषण समस्या। हमेंं इसका जोर कम करने के लिए और श्रमिकों का स्तर घटने से रोकने के तुरंत उपाय करने होंगे। मेरा विश्वास है कि स्थिति सहज बनाने के लिए तीन काम जरूरी हैं। पहला, काम के घंटे घटाना ताकि बहुत से लोगों को रोजगार मिल सके। दूसरा, न्यूनतम वेतन लागू करने के लिए व्यवस्था की स्थापना। बेरोजगारी के साथ ही ऐसी तंत्र व्यवस्था के अभाव में श्रमिकों के स्तर में गिरावट अवश्यंभावी है जिसे रोकना होगा। तीसरा, मालिकों और मजदूरों से संकल्प कराना कि वे मिल बैठकर बात करेंगे और मिलजुल कर साझा समस्याओं को सुलझाएंगे। मेरे निर्णय में इससे अधिक प्रभावशाली कुछ नहीं हो सकता कि मजदूर संघ मजबूत और जिम्मेदार बनें।’
‘‘मैं यह दावा नहीं कर सकता कि श्रम विभाग में शिथिलता नहीं है। मैं कहता हूं कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। ये अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन से उत्पन्न हुई हैं जो कंवेंशन निर्णयों के कारण हैं। मैंने कहा है कि कंवेंशनों की पुष्टि न किए जाने से ये समस्याएं विकराल बन गई हैं। साथ ही मैं यह भी कहूंगा कि सरकार द्वारा कंवेंशनों की आवश्यक बातों को मान्यता न देने का कारण आनाकानी करनी नहीं है। इसका कारण मुख्य रूप से वे नियम हैं जिनके कारण यह आवश्यक है कि समझौतों को बिना परिवर्तन या संशोधनों को ही स्वीकार किया जाए। इन्हें संपूर्ण रूप में ही स्वीकार करना है या नहीं करना है। मेरा विश्वास है कि यहीं प्रावधान है जिसके कारण हमें यह नीति अपनानी पड़ती है। यही बड़ी कठिनाई है। इससे हमें यह छूट नहीं कि हम एक-एक करके उठाएं जो भारत जैसे पिछड़े देश के लिए एकमात्र विकल्प और आशा है।