श्रमिकों के प्रति सरकारी दायित्व
चरणबद्ध प्रगति
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मैं इस नियम में संशोधन पर बल देना चाहता हूं क्योंकि यह एशियाई देशों के लिए बहुत आवश्यक है जिन्हें एक लंबा सफर तय करना है। मौजूदा प्रावधान में यह संशोधन करना असंभव नहीं होना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के लिए यह संभव है कि एक समझौते का प्रारूप तैयार किया जाए जिससे विभिन्न चरणों की व्यवस्था की जा सके। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के लिए यह भी संभव है कि वह एक ऐसा समझौता नियत करे जो चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सके, जिसमें यह व्यवस्था भी हो कि समझौतों की सूची पर नियत समय में काम पूरा किया जा सके। मुझे विश्वास है कि आप मुझसे सहमत होंगे कि ऐसा परिवर्तन किया जाए कि अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को कई चरणों में पूरा किया जाए, जो ऐसे नियमों के अलावा हों जिनके कारण काम रुक जाता है।
कहीं आपको भ्रांति न रहे, इसलिए मैं एक और प्रसंग का उल्लेख करना चाहता हूं। आपको याद होगा कि मैंने सम्मेलन का विधान बदलने पर विचार के लिए समिति बनाने का प्रस्ताव किया था। आप जानना चाहेंगे कि सरकार समिति की रिपोर्ट पर क्या करना चाहती है।
समिति की सिफारिश के अनुसार, सरकार का, सम्मेलन का विधान बदलने का कोई इरादा नहीं है। सरकार इतना ही काफी समझती है कि समिति की सिफारिश के अनुसार संगठन का नाम बदलने के सिवाय और कुछ न किया जाए। सम्मेलन की बैठकें कई नामों से होती हैं जैसे - मंत्री सम्मेलन, त्रिपक्षीय सम्मेलन और पूर्ण सम्मेलन। मुझे प्रसन्नता है कि समिति ने फैसला किया है कि इसे ‘‘श्रम सम्मेलन’’ कहा जाए। शेक्सपीयर के इस कथन के बावजूद कि नाम में क्या रखा है, ‘‘श्रम सम्मेलन’’ नाम से ‘‘पक्षीय’’ या ‘‘पूर्ण’’ का आभास नहीं होता। मैं केवल यह टिप्पणी करना चाहता हूं कि समिति द्वारा सुझाए गए नाम में रंगत नहीं है। यह ऐसा दोष है जिसे आसानी से दूर किया जा सकता है। यदि इसे निर्णयानुसार ‘‘श्रम सम्मेलन’’ कहीं कहना है तो हम फैसला करें कि इसे ‘‘भारतीय श्रम सम्मेलन’’ कहा जाए। मैं समझता हूं कि आपकी इस बिंदु पर सहमति होगी।
‘‘सरकार एक और चीज करना चाहती है जिसका रिपोर्ट से संबंध नहीं है। वह है सम्मेलन का कार्यक्षेत्र विस्तृत करना।’’
‘‘पेरिस में हुए पिछले श्रम सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधि ने वचन दिया था कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में पारित समझौतों को इस संस्था में सिफारिशों के लिए पेश किया जाएगा। भारत सरकार उस वचन को निभाना चाहती है। इससे प्रांत और देसी राज्यों को यह पता चल करेगा कि प्रत्येक अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में क्या किया गया ताकि उसे संदर्भ में विचारों का लाभ उठाया जा सके।’’