50. श्रमिकों के प्रति सरकारी दायित्व - Page 299

274 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सम्मेलन की कार्यवाही

भारतीय श्रम सम्मेलन ने 27 नवम्बर की बैठक में, कारखानों में सप्ताह में 48 घंटे काम की अवधि निर्धारित करने का सर्वसम्मत समर्थन किया था। इसमें केंद्र और प्रांतीय सरकारों, महत्वपूर्ण देसी राज्यों, प्रबंधकों और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। सरकार के इस प्रस्ताव पर कि औद्योगिक कैंटीनों की व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा दिया जाए और 1934 के कर्मचारी मुआवजा कानून में संशोधन किया जाए लगभग पूरी सहमति थी।

श्रम विभाग के ज्ञापन में कहा गया कि कर्मचारी को कारखाने के अतिरिक्त समुचित समय दिया जाए। इससे उन्हें वंचित रखना अन्यायपूर्ण और विवेकपूर्ण है। यह नागरिक भाव जागृत करने और उनकी शारीरिक क्षमता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। इस बात पर बल दिया गया कि इस समय एक अच्छा अवसर है कि इस विषय पर बात की जाए क्योंकि उन कारखाना कर्मचारियों को राहत पहुंचानी होगी, जिन पर युद्ध के दौरान भारी दबाव पड़ा। जब काम के घंटे कम होंगे, तो नौकरी ज्यादा लोगों को मिलेगी। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया था कि काम के घंटे कम करने से मूल वेतन और मंहगाई भत्ते पर तब तक कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए जब तक कीमतों में गिरावट न आए। अंशकालिक कर्मचारियों की दरें इस सिद्धांत पर समायोजित की जाएं कि उनकी आय नियतकालिक कर्मचारियों से कम नहीं होनी चाहिए।

सम्मेलन में इस बात पर भी विचार किया गया कि युद्ध के पश्चात निठल्ले हुए सैनिक कार्मिकों और छंटनी किए गए युद्ध कर्मचारियों की सहायता के लिए श्रम विभाग द्वारा बनाए गए रोजगार दफतरों का संगठन और कार्यप्रणाली क्या हो।

इस विषय पर श्रम विभाग के ज्ञापन में कहा गया है कि रोजगार दफतर केवल तभी उपयोगी सहायता पहुंचा सकते हैं जब उनके पास उपलब्ध या संभावित रोजगार अवसरों की सूचना हो। इसमें आगे कहा गया है कि रोजगार कार्यालय संगठन प्रबंधकों और रोजगार चाहने वालों को लाभ पहुंचाएगा और उत्पादन की विभिन्न शाखाओं में जनशक्ति का संतोषजनक वितरण भी करेगा। इससे, एक स्थान के कर्मचारियों में व्यावसायिक और औद्योगिक गतिशीलता आएगी और विविध श्रेणियों के कर्मचारियों की आपूर्ति में आने वाली बाधाएं भी दूर होंगी।

आज के अधिवेशन में हड़तालों, तालाबंदी जबरदस्ती काम से हटाए जाने वाले कर्मचारियों को मुआवजे से उत्पन्न स्थिति पर नियंत्रणों के अतिरिक्त दो अन्य मुद्दों पर विचार किया गया। इनमें पहला प्रश्न कल के लिए स्थगित कर दिया गया और दूसरे के बारे में सम्मेलन में सहमति नहीं हो पाई।