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श्रमिकों के प्रति सरकारी दायित्व

न्यूनतम वेतन

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जब सम्मेलन के सातवें अधिवेशन की समापन बैठक 28 नवम्बर हो हुई तो माननीय डाक्टर अम्बेडकर ने घोषणा की कि मालिकों और श्रमिकों के दो-दो प्रतिनिधि शामिल करके एक समिति बनाई जाएगी जो न्यूनतम वेतन के विषय में कानून का प्रारूप तैयार करेगी और भारतीय श्रम संघ अधिनियम, 1926 में संशोधन का प्रारूप बनाएगी।

हालांकि इन दोनों उपायों के बारे में सिद्धांतों पर सहमति हो गई, किंतु विचार-विमर्श के दौरान विविध विचार प्रकट किए गए। सम्मेलन में वक्ताओं द्वारा इन दोनों उपायों के महत्व पर जोर देने से, समिति के गठन से इन पर विस्तार से चर्चा हो सकेगी।

सम्मेलन में औद्योगिक मामलों पर स्थायी व्यवस्था करने पर हड़ताल तथा तालाबंदी के दौरान रोजगार दफतरों की संभावित भूमिका पर सर्वसम्मति थी। इस पर सहमति थी कि हड़तालों और तालाबंदी के समय ये दफतर रिक्तियों को स्वीकार कर लें और पात्र उम्मीदवारों को श्रम विवाद के बारे में सूचित करें। वे कर्मचारियों के नाम दर्ज करें और उन्हें दूसरी नौकरियों के लिए भेजें और संभावित प्रबंधकों को बताएं कि ये लोग श्रम विवाद के कारण बेरोजगार हुए हैं।