51. उड़ीसा की नदियों के विकास की बहुउद्देशीय योजना - Page 301

276 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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ऽउड़ीसा की नदियों के विकास

की बहुउद्देशीय योजना

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर का कटक में भाषण

‘‘उड़ीसा, बाढ़ की विभीषिका से मुक्ति चाहता है। उड़ीसा मलेरिया से मुक्ति पाना चाहता है और, एक अमरीकी मुहावरे के शब्दों में, कम आयु और कमजोरी से उत्पन्न बीमारियों से अपनी जनता पर लगे कलंक को धोना चाहता है। उड़ीसा, नौवहन तथा सस्ती बिजली तैयार करके अपनी जनता का जीवन-स्तर सुधारना चाहता है। उसके ये सभी उद्देश्य सौभाग्य से एक योजना से पूरे हो सकते हैं अर्थात जलाशयों का निर्माण और नदियों के बह जाने वाले पानी का भंडारणं’’

भारत सरकार के श्रम सदस्य, माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने यह विचार उड़ीसा की नदियों के संभावित विकास पर विचार करने के लिए 8 नवम्बर को कटक में आयोजित सम्मेलन को अध्यक्ष पद से संबोधित करते हुए प्रकट किए। इसमें केंद्र सरकार, उड़ीसा सरकार, सैंट्रल प्रोविंसेस और पूर्वी राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

उड़ीसा की समस्याएं

उड़ीसा की समस्याओं का जिक्र करते हुए श्रम सदस्य ने कहाः ‘यह कहना कि समस्या बाढ़ की है, समस्या को अति सहज मान लेना और उसे बहुत कम करके देखना है। मैं इन समस्याओं को दूसरे रूप में देखता हूं। मैं जब उड़ीसा के विषय में विचार करता हूं मेरे मन में एक तस्वीर उभरती है कि वहां के लोगों के सामने केवल एक विपदा नहीं, अनेक हैं।

‘‘ऐसी एक विपदा जो सब की जुबान पर है वह है बाढ़ जिससे लोगों को बराबर जूझना पड़ता है और जिससे जन-धन की बर्बादी होती है। विपदा केवल बाढ़ के कारण ही नहीं है, बल्कि सूखा और अकाल से भी है। सूखे और अकाल से भी

ऽ इंडियन इन्फार्मेशन, 15 दिसम्बर, 1945, पृष्ठ 692-95