उड़ीसा की नदियों के विकास की बहुउद्देशीय योजना
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उतना ही अधिक नुकसान पहुंचता है जितना बाढ़ से। कहा जाता है कि 1866 के सूखे में पुरी जिले के 40 प्रतिशत लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा था।
‘‘ उड़ीसा के लोगों के स्वास्थ्य में आई गिरावट भी एक और विपदा है। उड़ीसा प्रांत की कुल जनसंख्या 77.5 लाख है। प्रांत की स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार, 1944 में कुल 2,35,581 लोगों की मृत्यु हुई जिनमें से आधे मलेरिया के कारण मारे गए। छात्रों में से 19 प्रतिशत को कुपोषण के स्पष्ट चिह्न थे, और 8.7 प्रतिशत में विटामिनों की कमी थी।’’
यदि यह तथ्य है, तो यह नहीं कहा जा सकता कि उड़ीसा गरीबी की रेखा के ऊपर है। उड़ीसा की तीसरी विपदा, यदि इसे विपदा का नाम दिया जा सकता है तो आंतरिक संचार की है। उड़ीसा एक अलग-थलग प्रांत है। उसके पूर्वी समुद्र तट की इकलौती रेल लाइन को छोड़कर वहां न आय कोई थल मार्ग है और न जल मार्ग जो समुद्र तट और उसके अंदरूनी भागों को जोड़ता है।’’
‘‘क्या उड़ीसा उतना ही दरिद्र राज्य बना रहे जितना वह आज है? ‘‘डॉ. अम्बेडकर ने पूछा और कहाः ‘‘ऐसा नहीं रहेगा। उसके पास प्राकृतिक संपदा है और वह भी कोई कम मात्रा में नहीं। उड़ीसा में कोयला है, उड़ीसा में लोहा है, क्रोम, ग्रेफाइट, चूना पत्थर, अभ्रक है, और उड़ीसा में बांस है। ये उसके कुछ प्राकृतिक साधन हैं।’’
‘‘उड़ीसा की एक और बहुमूल्य चीज है उसकी जल संपदा। उड़ीसा की नदियों में जितना जल बहता है उसे विशाल कहा जा सकता है। इसके डेल्टा में जिसमें तीन जिले कटक, पुरी और बालासोर हैं जिनका क्षेत्रफल 8000 वर्ग मील है - तीन नदियों महानदी, ब्राह्मणी और वैतरणी की सहायक नदियों का जाल बिछा है।’’
‘‘अपेक्षाकृत कम महत्व की दो अन्य नदियों बूढ़ाबलंग और सुवर्णरेखा भी डेल्टे में बहती है। उपरोक्त तीन मुख्य नदियां 69,000 वर्ग मील में पूर्वी राज्यों, मध्य प्रांतों और बिहार से होकर आती हैं। इनमें से सबसे बड़ी महानदी 51,000 वर्ग मील में बहती है। ये तीनों नदियां प्रतिवर्ष 9 करोड़ एकड़ फुट पानी समुद्र में छोड़ती हैं।’’
जल संपदा का उपयोग
श्रम सदस्य ने आगे कहा, ‘‘इतने साधनों के बावजूद, उड़ीसा इतना निर्धन, इतना पिछड़ा और इतना दरिद्र क्यों हैं? इसका मैं एक ही उत्तर दे सकता हूं कि उड़ीसा ने अपनी जल संपदा का सदुपयोग नहीं किया है। बाढ़ के बारे में निस्संदेह काफी प्रयत्न किए गए हैं। कम से कम 1872 में श्री रेहंद ने एक बड़ी जांच की थी। पता नहीं उसकी रिपोर्ट का क्या हुआ। लगता है 1928 तक उस पर कुछ नहीं किया गया। उस