51. उड़ीसा की नदियों के विकास की बहुउद्देशीय योजना - Page 303

278 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

साल से 1945 तक इस समस्या को सुलझाने के लिए कई समितियां बनाई गई।

‘‘1928 में उड़ीसा बाढ़ जांच समिति के अध्यक्ष बंगाल के सुप्रसिद्ध मुख्य अभियंता श्री एडम्स विलियम थे। 1937 में यह कार्य सुयोग्य हस्ती श्री एम. विश्वेश्वरैया को सौंपा गया। उन्होंने अपनी दो रिपोर्ट में से एक 1937 में पेश की और दूसरी 1939 में। उनके काम को उड़ीसा बाढ़ परामर्श समिति ने आगे बढ़ाया। समिति ने 1938 में अपनी आरंभिक रिपोर्ट पेश की और 1942 तक कार्य जारी रखा। इस अवधि में इसने तीन अंतरिम रिपोर्ट पेश कीं। इस दिशा में नवीनतम प्रयत्न 15 मार्च, 1945 में किया गया जब उड़ीसा सरकार ने कटक में एक बाढ़ सम्मेलन बुलाया।

‘‘समितियों के सदस्यों से मैं सादर खेद प्रकट करते हुए कहता हूं कि इस समस्या पर उन्होंने सही नीति प्रकट नहीं की। उन पर यह विचार हावी है कि पानी की बहुतायत एक संकट है। जब पानी अधिक मात्रा में आता है तो उसे अपने तरीके से समुद्र में बह जाने दिया जाए। ये दोनों गलत धारणाएं हैं क्योंकि जन कल्याण की दृष्टि से ये खतरनाक हैं।

जल संरक्षण

‘‘यह सोचना गलत है कि पानी की बहुतायत कोई संकट है। मनुष्य को पानी की बहुतायत के बजाए पानी की कमी के कारण ज्यादा कष्ट भोगने पड़ते हैं। कठिनाई यह है कि प्रकृति जल प्रदान करने में केवल कंजूसी ही नहीं करती, उसका वितरण भी अनिश्चित है जो कभी सूखे से सताता है तो कभी तूफान ला देता है। परंतु इससे इस तथ्य पर कोई अंतर नहीं पड़ता कि जल एक संपदा है। इसका वितरण अनिश्चित है इसके लिए हमें प्रकृति से शिकायत नहीं करनी चाहिए बल्कि जल संरक्षण करना चाहिए।

‘‘जनहित के लिए यदि पानी का संरक्षण अनिवार्य है, तो पुश्ता बनाने की योजना गलत है। यह ऐसा तरीका है जिससे जल संरक्षण का अंतिम लक्ष्य प्राप्त नहीं होता। इसलिए इसे त्याग दिया जाना चाहिए। उड़ीसा का डेल्टा ही एकमात्र उदाहरण नहीं है जहां अत्यधिक पानी आता है और उसके कारण बहुतायत से संकट उत्पन्न होता है। अमरीका में भी यह समस्या है। वहां कुछ नदियां है - मिस्सौरी, नियामी और हेतेसी, जिन्होंने ऐसी समस्याएं उत्पन्न की हैं।

‘‘इसलिए उड़ीसा को भी वहीं तरीका अपनाना चाहिए जो नदियों की समस्या से निपटने के लिए अमरीका ने अपनाया है। वह तरीका है पानी का स्थायी भंडार रखने के लिए कई जगह नदियों पर बांध बनाना। ऐसे बांध सिंचाई के साथ अन्य कई लक्ष्य