51. उड़ीसा की नदियों के विकास की बहुउद्देशीय योजना - Page 304

उड़ीसा की नदियों के विकास की बहुउद्देशीय योजना

279

भी साधते हैं। मुझे बताया गया है कि यदि महानदी में बह जाने वाले पूरे पानी का भंडारण संभव है, तो इतनी भूमि होने पर, दस लाख एकड़ जमीन की सिंचाई हो सकती है। जलाशयों में एकत्र जल से बिजली उत्पादन भी हो सकता है।

‘‘यदि प्राकृतिक साधन होने के बावजूद उड़ीसा औद्योगिक रूप से पिछड़ा हुआ है, तो इसका कारण कारखाने चलाने के लिए सस्ती बिजली का अभाव है। यहां बहुत बिजली मिलेगी, उससे भी अधिक जितनी उड़ीसा दीर्घावधि के लिए आशा कर सकता है। पानी का अन्य उपयोग नौवहन के लिए हो सकता है।

‘‘भारत में नौवहन का बहुत उतार-चढ़ाव वाला इतिहास है। ईस्ट इंडिया कंपनी के काल में कंपनी सरकार में अंतर्देशीय नौवहन के लिए लोक निर्माण बजट में अच्छी

खासी राशि का प्रावधान किया जाता था। आज भी भारत में कई नौवहन नहरें हैं -यहां उड़ीसा में भी एक है - ये उसी नीति के अवशेष हैं। रेल बाद में आई और बहुत समय तक रेलवे और नौवहन दोनों चलते रहे। 1875 में रेलवे बनाम नहर का भारी विवाद उठा। नहरों का पक्ष सर आर्थर काटन ने बड़ी प्रबलता से रखा जो उच्च विचारों वाले एक इंजीनियर थे। दुर्भाग्य से रेल के पक्षधर जीत गए।’’

‘‘मैं नहरों पर रेलवे की विजय से प्रसन्न नहीं हूं। रेलवे के समर्थकों के बारे में सबसे ज्यादा क्षोभ की बात तो यह अनभिज्ञता है कि नहरें समाप्त की जाएं क्योंकि उनसे आय नहीं होती यह जाने बिना कि नहरें इसलिए आमदनी नहीं दे पाई क्योंकि उनकी आय देने की क्षमता नहीं है बल्कि उनकी आमदनी की क्षमता को बुरी तरह तहस-नहस किया गया और नहरों को अधूरा छोड़ दिया गया। मुझे विश्वास है कि अंतर्देशीय नौवहन को पहले की तरह इस प्रकार नकारा नहीं जा सकता है। इस बारे में जर्मनी और रूस से कुछ सीखना होगा और न केवल अपनी पुरानी नहरों का पुनर्निर्माण करना होगा बल्कि नई नहरें भी बनानी पड़ेगी और रेलवे के लिए उन्हें कुर्बान नहीं किया जा सकता।’’

विशेष पहलू

श्रम सदस्य ने दोहराया कि उड़ीसा की नदियों के लिए जो जल भंडारण कार्यक्रम लागू किया गया है इससे न केवल सिंचाई और बिजली की सुविधाएं मिलेगी बल्कि काफी दूरी का अंतर्देशीय नौवहन मार्ग भी खुलेगा। ‘‘मुझे बताया गया है कि इससे चंदबली से संबलपुर और उससे आगे तक का जल मार्ग खुलेगा जिसके लिए तीन बांध बनाने होंगे - (1) पहाड़ों से नदी के निकास स्थल पर (नराज से सात मील ऊपर), (2) टिक्कीपाड़ा 42, (3) संबलपुर के ऊपर। यदि इस योजना पर काम किया जाता है तो 350 मील की जल परिवहन योग्य नहर बन सकती है जो पूरे साल चलती रहेगी और यात्री तथा माल ढुलाई के लिए सुविधाजनक साधन हो सकती है।