51. उड़ीसा की नदियों के विकास की बहुउद्देशीय योजना - Page 306

उड़ीसा की नदियों के विकास की बहुउद्देशीय योजना

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से उड़ीसा की नदियों के सर्वेक्षण और अन्वेषण की आवश्यकता पर विचार करना शामिल है जिसके अंग हैंः (क) बाढ़ नियंत्रण, (ख) नौवहन, (ग) सिंचाई और जल निकासी, (घ) भूमि संरक्षण, और (ड.) बिजली उत्पादन। (2) सर्वप्रथम महानदी पर नियंत्रण और इसके विकास के उद्देश्य से सर्वेक्षण और अन्वेषण की आवश्यकता पर विचार करना। (3) केंद्र सरकार के सामान्य निर्देश के अंतर्गत और केंंद्रीय जल मार्ग, सिंचाई और नौवहन आयोग के सहयोग से, प्रांतीय सरकार द्वारा किए जा रहे सर्वेक्षण और अनुसंधान की वांछनीयता का पता लगाना।’’

आज हमारा मुख्य प्रयोजन यह देखना है कि क्या हम क्षेत्र विकास के लिए व्यापक सर्वेक्षण और प्राकृतिक संपदा के अनुसंधान की आश्यकता पर सहमत हो सकते है। स्थिति का संतुलित आकलन करने के लिए यह आवश्यक है कि हम सिंचाई की सुविधाओं, नौवहन, बिजली विकास और उनसे जनित सुविधाओं तथा क्षेत्र से जल निकासी के उद्देश्य से एक व्यापक सर्वेक्षण कराएं। अभी तक का सर्वेक्षण मात्र डेल्टा तक सीमित है हालांकि 1872 में महानदी की पांच सहायक नदियों तलकोमा, इबकोमा, मौडकोमा, हसद और जोंक पर छोटे जलाशय बनाने के बारे में कुछ काम हो चुका है।

भारत सरकार ने ‘‘योग्य और प्रसिद्ध सिंचाई इंजीनियर रायबहादुर खोसला की अध्यक्षता में केंद्रीय जल मार्ग, सिंचाई और नौवहन आयोग का गठन किया था। वह अपनी जांच पड़ताल के सिलसिले में जल्दी ही उड़ीसा की नदियों के जल विज्ञान और दूसरे सर्वेक्षण आरंभ करेगा। प्रांतों और राज्यों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे आयोग के सामान्य निर्देश और सहयोग से संबंधित सर्वेक्षण शुरू करें।

क्षेत्रों का जलमग्न होना

समापन से पूर्व, डॉ. अम्बेडकर ने कहाः ‘‘इस सम्मेलन में भाग लेने वाले पक्षों का ध्यान मैं दो बातों पर दिलाना चाहता हूं। उनका इस परियोजना की सफलता से घनिष्ट संबंध है और वे जल्दी ही इस संबंध में निश्चय कर लें। पहला मुद्दा है कि वे भूमि के जलमग्न होने के प्रश्न पर विचार करें। बांधों के बनने पर जो जलाशय बनेंगे उनसे उड़ीसा और पूर्वी राज्यों की बहुत सी जमीन पानी में डूब जाएगी। यदि इन बांधों को नदी या सहायक नदियों की सतह से ऊंचा उठाकर बनाया जाएगा तो मध्य प्रांत के भाग भी पानी से नीचे आएंगे। इस प्रश्न पर समन्वित योजना के लाभों को देखते हुए विस्तार से विचार करना है।’’

‘‘नदियों के फालतू पानी को बहने और तबाही रोकने के लिए भूमि का पानी में डूबना अवश्यंभावी है। समन्वित और बहुउद्देशीय विकास इस जलमग्नता की हानि की क्षति पूर्ति कर देगा। यह परियोजना तभी सफल हो सकती है तब इसे क्षेत्रीय