282 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
परियोजना समझा जाए। इसे स्थानीय समझने से यह सफल नहीं होगी। उड़ीसा प्रांत यदि इसे अपनी सीमाओं तक रखेगा तो वह सफल नहीं होगा। यदि उड़ीसा का कोई राज्य ऐसा प्रयत्न करेगा तो भी वही परिणाम होगा।
यह परियोजना मूलतः क्षेत्रीय है, इससे राज्यों और प्रांतीय क्षेत्रों का आवश्यक क्षेत्र पानी में डूबने का सवाल जुड़ा हुआ है। यह दूसरा प्रश्न है जो मैं रखना चाहता हूं। उड़ीसा के राज्यों और प्रांतीय सरकार को अपने सत्ता वाले विभिन्न क्षेत्रों में अपनी वह भूमि छोड़नी पड़ेगी जहां से नदियां बहती हैं जिससे कि परियोजना पर काम हो सके, उनकी योजना बन सके और राज्यों अथवा प्रांत सरकार के हस्तक्षेप के बिना एक प्राधिकरण उसे चला सके। यह बताने की कोई आवश्यकता नहीं है कि लोगों का कल्याण उड़ीसा सरकार और देसी राजाओं की सत्ता से अधिक महत्वपूर्ण है। वे अपनी सत्ता का उपयोग लोगों के कल्याण के लिए करें, उसमं बाधा डालने के लिए नहीं। केंद्र सरकार और प्रांतीय सरकार तथा रजवाड़ों के सहयोग और तालमेल से उड़ीसा की उस अक्षय जल संपदा का सदुपयोग हो सकता है जो बेकार जाता है और सागर में पहुंचने से पूर्व अकथनीय आपदाएं उपस्थित करता है।
उड़ीसा की नदियों का सर्वेक्षणः सम्मेलन का फैसला
सम्मेलन में फैसला किया गया कि समन्वित और बहुउद्देशीय विकास हेतु उड़ीसा की नदियों का सर्वेक्षण करने की योजना बनाई जाए। इस आरंभिक सर्वेक्षण के बाद जो बहुउद्देशीय योजना बनाई जाएगी उनमें बाढ़ नियंत्रण, नौवहन, सिंचाई, जल निकासी, भूसंरक्षण और बिजली उत्पादन शामिल है।
सम्मेलन में सहमति थी कि पहले महानदी के नियंत्रण और विकास की आवश्यकता है। फिर यह निश्चय हुआ कि सर्वेक्षण का काम प्रांतीय सरकार तथा केंद्रीय जलमार्ग, सिंचाई और नौवहन आयोग के सहयोग और उसी की देखरेख में किया जाए।
यह स्पष्ट किया गया कि शुरू में आयोग महानदी का पूरी लंबाई में सर्वेक्षण कराएगा और यदि खोजबीन में प्रथम दृष्टि से प्रांत और राज्यों से लाभ की दृष्टि से विकास की गुंजाइश का पता चला, तो आगे सर्वेक्षण और छानबीन की जाएगी। इसके लिए संबद्ध पक्षों का प्रशासनिक और आर्थिक सहयोग आवश्यक होगा। तब तक केंद्रीय जल मार्ग, सिंचाई और नौवहन आयोग का, हाल में ही गठित उड़ीसा प्रांत के नदी मंडल के सहयोग से आरंभिक टोह लेने का इरादा है। इस बात पर सहमति थी