51. उड़ीसा की नदियों के विकास की बहुउद्देशीय योजना - Page 308

उड़ीसा की नदियों के विकास की बहुउद्देशीय योजना

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कि मध्य प्रांत सरकार और पूर्वी राज्य केंद्रीय जल मार्ग, सिंचाई और नौवहन आयोग को पूरे आंकड़े और सूचनाएं उपलब्ध कराएंगे क्योंकि यह उनके पास मौजूद है और महानदी की संभावनाओं का पता लगाने में पूरा सहयोग करेंगे।

श्री गोखले का भाषण

उड़ीसा के महामहिम गवर्नर के सलाहकार श्री बी.के. गोखले ने डॉ. अम्बेडकर द्वारा वर्णित योजना का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘उड़ीसा शायद भारत का सबसे पिछड़ा राज्य है और प्रस्तावित बहुउद्देशीय विकास की इस योजना से अधिक कोई एकल योजना यहां के लोगों की दशा में सुधार नहीं कर सकती। उन्होंने आधुनिक काल तक के उड़ीसा के इतिहास पर प्रकाश डाला और कहा कि क्षेत्रीय विकास की जिस योजना पर विचार किया जा रहा है उससे इस क्षेत्र की खुशी और सम्पन्नता का मार्ग प्रशस्त होगा।

ऽयुद्धोत्तर सिंचाई और पनबिजली योजनाएं

‘‘भारत निस्संदेह सिंचाई के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी है। भारत के लिए इसके महत्व पर भी संदेह नहीं। अपनी तीव्रता से बढ़ती जनसंख्या की दृष्टि से जीवित रहने के लिए सिंचाई जरूरी है।’’ यह विचार 26 नवम्बर को नई दिल्ली में वाइसराय भवन के परिषद कक्ष में महामहिम वाइसराय ने केंद्रीय सिंचाई मंडल की 16वीं वार्षिक बैठक में प्रकट किए। भारत सरकार के विशेषज्ञों, प्रांतों और राज्यों के मुख्य अभियंताओं, श्रम सदस्य, माननीय डॉ. अम्बेडर, श्रम सचिव, माननीय श्री एच.सी. प्रियोर ने बैठक में भाग लिया।

वाइसराय ने कहा, ‘‘मुझे इस केंद्रीय सिंचाई मंडल की 16वीं बैठक का उद्घाटन करने पर प्रसन्नता है। आपकी इंजीनियरी शाखा पुरानी है, महत्वपूर्ण है, और बहुत सम्माननीय है। सिंचाई इंजीनियर संसार के प्राचीनतम विशेषज्ञों में से हैं। जेनेसिस के द्वितीय अध्याय से पता चलता है कि एक ‘‘नदी ईडन से निकल कर वाटिका को सिंचित करती है।’’ सिंचाई का यह पहला उदाहरण है। मिस्र और मेसोपोटामिया की दो प्राचीन सभ्यताएं वास्तव में सिंचाई की देन थी और आपके शिल्प में शायद अति सम्माननीय संगम अथवा इन देशों के बीच भ्रातृत्वभाव था।

ऽ इंडियन इन्फार्मेशन, 15 दिसम्बर, 1945, पृष्ठ 697