52. छंटनी के बारे में रेलवेमेंस पफेडरेशन की मांग अस्वीकृत - Page 310

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ऽछंटनी के बारे में रेलवेमेंस

फेडरेशन की मांगें अस्वीकृत

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः अध्यक्ष महोदय, सुबह जब कार्य स्थगन प्रस्ताव बहस के लिए स्वीकार किया गया तो मैंने यह नहीं सोचा था कि श्रम विभाग का इस बहस में उल्लेख होगा जिसका मुझे जवाब देना पड़ेगा। परंतु जब बहस शुरू हुई तो मैंने देखा कि प्रस्ताव का समर्थन करने वाले दो सदस्य श्रम विभाग पर बुरी तरह बरसे। उनका आरोप था कि यद्यपि काफी समय से विवाद चल रहा है, तथापि श्रम विभाग से जो भूमिका निभाने की अपेक्षा थी वह उसने नहीं निभाई। श्रीमन्, मैं स्वीकार करता हूं कि इस मामले में श्रम विभाग का बहुत दायित्व है। इस विभाग की स्थापना इसलिए की गई है कि वह श्रमिकों के हितों का संरक्षण करें, किन्तु यदि वह इसमें असमर्थ रहा है तो निस्संदेह वह निंदा का पात्र है जो प्रस्ताव में की गई है। परंतु मुझे खेद है कि मेरे माननीय मित्र सरदार मंगल सिंह ने सबसे पहले श्रम विभाग के दायित्वों की ओर संकेत किया और हल्के तौर से कुछ ऐसा कहा, यदि मैं ठीक समझा कि श्रम सदस्य या तो सो गए हैं या हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। वह शायद वस्तु स्थिति से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं और उन्हेंं पता नहीं है कि इस मामले में श्रम विभाग ने क्या किया है। मैं सोचता हूं कि यह वांछनीय है कि मैं सदन के समक्ष इस बारे में संगत तथ्य पेश करूं।

श्रम विभाग को तब 5 अक्तूबर, 1945 को सबसे पहले पता चला कि रेलवेमेंस फेडरेशन और रेलवे बोर्ड के बीच विवाद है जब रेलवेमेंस फेडरेशन के एक अधिकारी ने एक पत्र भेजा जिसमें रेलवेमेंस फेडरेशन की ओर से पारित कई प्रस्तावों का उल्लेख था। उस पत्र के बाद 10 अक्तूबर, 1945 को श्रम विभाग को दूसरा पत्र भेजा गया। उस पत्र में यह अनुरोध किया गया था कि श्रम विभाग आगे आए और एक निर्णायक

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 1, संख्या 2, 22 जनवरी, 1945, पृष्ठ 106-08