छटनी के बारे में रेलवे फेडरेशन की मांगे अस्वीकृत
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को रेल विभाग को बताना है कि रेल विभाग से उनके मिलने की निश्चित तारीख कौन सी है।
दीवान चमनलालः क्या मैं अपने माननीय मित्र से एक बार फिर पूछ सकता हूं कि क्या यह सच है कि सरकार ने रेलवेमेंस फेडरेशन को यह सूचना देने से इंकार कर दिया है कि उसने कितने लोगों की छटनी का फैसला किया है और, दूसरे क्या उन्होंने निर्णायक की नियुक्ति करने से इंकार कर दिया है और तीसरे क्या वे अब भी लोगों की छटनी कर रहे हैं? मेरा विचार है कि लगभग 10,000 की पहले ही छटनी कर दी गई है। फिर आगे बातचीत का प्रश्न ही कहां रह गया जब सरकार अपने मन से काम कर रही है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मेरे माननीय मित्र शायद भूल गए कि जब मैं बहस में बोलने के लिए खड़ा हुआ था तो मैंने कहा था कि मैं केवल निर्णायक के प्रश्न तक ही सीमित रहूंगा। शेष प्रश्न कि और कितनी छटनी होगी, क्या कोई छटनी होगी, यदि होगी तो उनके साथ क्या होगा - यह सब वह मामला है जिस पर मेरे मान्यवार सहयोगी मेरे बाद बताएंगे। जैसाकि मैंने कहा, मैं केवल उतना ही दायित्व बता रहा हूं जो श्रम विभाग का है। मेरा कहना यह था कि जब तक श्रम विभाग समझता है कि अब समझौते की आगे संभावना नहीं है, तो यह असंभव होगा और अनुचित भी तथा प्रक्रिया के विरुद्ध होगा कि श्रम विभाग बीच में आए और कहे, ‘‘हम निर्णायक नियुक्त करते हैं।’’ इसलिए मैं कहा रहा था कि जिस माननीय सदस्य ने श्रम विभाग पर आरोप लगाया है कि इस समय उसने कोई कदम नहीं उठाया निश्चित रूप से वह अनुचित आरोप है और मैं सोचता हूं कि इस तथ्य को ध्यान में रखा जाएगा जो मैंने स्पष्ट किया है। इस बयान को वह स्वयं ही वापस ले लेंगे जिसमें उन्होंने कहा है कि श्रम सदस्य हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। मैंने निश्चित ऐसा नहीं किया।
अब मैं प्रश्न के अगले पहलू पर आता हूं। यह सच है कि भारत रक्षा अधिनियम के तहत सरकार के पास यह अधिकार है कि वह भारत रक्षा अधिनियम के नियम 81 के अनुसार पंच नियुक्त कर सके। किंतु मैं यह बताना उचित समझता हूं कि यह एक आपातकालीन अधिनियम है परंतु फिर भी हम पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है कि हम नियम 81 के अधीन इसे न्यायनिर्णय के लिए न भेज सकें। पंच फैसले या न्याय निर्णय के लिए विचारणीय विषय पर किसी विवाद का होना आवश्यक है। जैसा कि मैंने कहा, इसमें कोई विवाद नहीं है, मामला विचाराधीन है। दूसरे, किसी निर्णायक के बारे में फैसला करने से पूर्व हमें यह विश्वास होना चाहिए कि मामला सेवा नियोजन की शर्तों से संबद्ध है - जैसे काम के घंटों, वेतन और इसी तरह की