52. छंटनी के बारे में रेलवेमेंस पफेडरेशन की मांग अस्वीकृत - Page 313

288 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बातों से। अब मुद्दा यह है कि क्या रेल विभाग और रेलवेमेंस फेडरेशन के बीच ऐसा विवाद है। मुझे खेद के साथ कहना पड़ता है कि रेलवेमेंस फेडरेश्न ने यह मामला ऐसे नहीं उठाया जैसे उसे उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने निश्चय ही स्वयं अपना नुकसान किया है। मैं इस संबंध में यह पूछना चाहता हूं कि आखिर वह मुद्दा क्या है जिस पर रेलवेमेंस फेडरेशन जोर दे रही है? क्या यह श्रमिकों के कार्य के घंटों के बारे में है? क्या यह वेतन से संबंधित है? फेडरेशन ने अनेक प्रस्ताव पास किए हैं उनमें से कई काम के घंटों और श्रमिकों की दशा से संबद्ध है। परंतु हमें यह अंतर करना है कि विवाद के मूल मुद्दे कौन से हैं और किनको उनके साथ जोड़ दिया गया है। यदि रेलवेमेंस फेडरेशन द्वारा पारित प्रस्तावों को देखा जाए, तो हम पाते हैं कि उनकी शिकायतों का सार यह है कि रेलवे एक भी व्यक्ति को न हटाए। समय के प्रश्न को सिर्फ जोड़ दिया गया है, वह मतभेद का मुद्दा नहीं है जो कुछ में कह रहा हूं उसकी पुष्टि के लिए यह बताना है कि रेल विभाग और रेलवेमेंस फेडरेशन के बीच प्रश्न छटनी का है, प्रश्न यह है कि कितने लोगों को हटाया जाएगा। मैं एक-दो और परिस्थितियों की ओर संकेत करना चाहता हूं।

पहली यह है - जैसा कि मैंने कहा, अपने 5 अक्तूबर, 1945 के पत्र में उन्होंने पन्द्रह या चौदह मांगें पेश की हैं। यह पता लगाने के लिए कि वास्तव में कौन से मुद्दे मूलभूत मुद्दे हैं, श्रम विभाग ने रेलवेमेंस फेडरेशन के अध्यक्ष श्री गिरी के साथ एक बैठक का आयोजन किया, और मैं सदन को बताऊंगा कि वैसे तो पन्द्रह प्रस्ताव थे, परंतु श्रम विभाग के सम्मुख विचार के लिए केवल तीन मुद्दे पेश किए गए, रेलवेमेंस फेडरेशन ने अन्य को महत्वपूर्ण नहीं माना। फिर जब रेलवेमेंस फेडरेशन और रेल विभाग की औपचारिक बैठक कराई गई, तो भी जो तीन मुद्दे श्रम विभाग के सामने रखे गए थे वे छोड़ दिए गए और जो एकमात्र मुद्दा रखा गया वह छटनी के बारे में था। रेलवेमेंस फेडरेशन के प्रति पूरा सम्मान बरतते हुए मैं स्वीकार करता हूं कि मैं नहीं समझा कि - कितने लोगों को विभाग नौकरी पर रखेगा - इसे न्यायाधीन विवाद कैसे माना जाए? जैसा कि मैंने कहा, रेलवेमेंस फेडरेशन के अध्यक्ष की ओर से इस विभाग से बातचीत के तरीके की प्रतीक्षा कर रहा हूं कि कोई मुद्दा हो जो न्यायाधीन हो जिससे कि श्रम मंत्रालय को बीच में आने लायक कुछ बात मिले और उसे निर्णायक नियुक्त करने के लिए तैयार किया जा सके। मान्यवर, मैं समझता हूं कि निंदा प्रस्ताव अनावश्यक है।