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ऽदामोदर घाटी परियोजना चलाने के लिए
गांवों को खाली कराने का प्रस्ताव
अध्यक्ष महोदयः दामोदर योजना की प्रक्रिया के संबंध में बिहार के हजारीबाग, मानभूमि और संथाल परगना के सैंकड़ों गांवों के हजारों लोगों को गांव खाली करने के लिए विवश करने के बारे में श्री रामनारायण सिंह का प्रस्ताव है। मैं जानना चाहता हूं कि माननीय सदस्य के इस प्रस्ताव का क्या आशय है।
बाबू राम नारायण सिंह (छोटी नागपुर डिवीजनः गैर-मुस्लिम)ः मान्यवर, कुछ जिलों में भूमि अधिग्रहण का काम चल रहा है। दामोदर योजना की प्रक्रिया में सरकार द्वारा अनेक गांवों को अधिग्रहीत किया जाएगा, और लोगों से क्षेत्र खाली करने के लिए कहा जाने वाला है।
अध्यक्ष महोदयः क्या मैं जान सकता हूं कि योजना कब शुरू हुई और कहां तक पहुंची?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः मैं निवेदन करना चाहता हूं कि इस समय कोई भी बात विचार किए जाने वाली नहीं है। निस्संदेह सरकार दामोदर नदी पर, जो बिहार और बंगाल से होकर बहती है, कुछ बांध बनाना चाहती है। परंतु इस कार्य स्थगन प्रस्ताव में जो विशेष मुद्दे उठाए गए हैं जिनमें जबरन जगह खाली कराए जाने की बात कही गई है उस पर मुझे इतना ही कहना है कि अभी बिल्कुल ही शुरूआती चरण है। हम केवल यह जाच कर रहे हैं कि जल को रोकने के लिए कितनी जमीन पानी के नीचे आएगी और कितने क्षेत्र पर असर पड़ेगा आदि। हम यह देखने की चेष्टा कर रहे हैं कि कितने लोगों को हटाना पड़ेगा, उनकी जोत कितनी है और उनके अधिकार क्या हैं? वास्तव में अभी कुछ निश्चित नहीं है। इस समय तक सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है जिस पर बहस की जा सके। मैं कहना चाहता
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 1, संख्या 12, 7 जनवरी, 1946, पृष्ठ 606